गोरखपुर। आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सीमित संसाधन किसी भी छात्र के सपनों की राह में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक पातीं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले 23 वर्षीय विशाल तिवारी ने यही साबित कर दिखाया है। एक ऑटो चालक के बेटे विशाल ने लगातार संघर्ष करते हुए चौथे प्रयास में NEET UG परीक्षा में सफलता हासिल की और अब उनका सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। इस सफलता के साथ उन्होंने अपने पिता से एक ऐसा वादा भी किया है जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।
विशाल तिवारी का परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति से जुड़ा हुआ है। उनके पिता वर्षों से ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी में घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं था। इसके बावजूद परिवार ने कभी शिक्षा से समझौता नहीं किया। माता-पिता ने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया और विशाल ने भी उनके विश्वास को टूटने नहीं दिया।
बताया जाता है कि विशाल ने NEET UG परीक्षा में चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। इस बार उन्होंने 720 में से 605 अंक प्राप्त किए, जो उनकी कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास का परिणाम है। इससे पहले तीन बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। हर असफलता से सीख लेकर उन्होंने अपनी तैयारी को और बेहतर बनाया और आखिरकार सफलता उनके कदम चूमने लगी।
विशाल की जिंदगी केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शादी के बाद पारिवारिक दायित्व भी बढ़ गए, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया। पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने अनुशासन और मेहनत के बल पर अपनी तैयारी जारी रखी।
उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने नियमित अध्ययन, मॉक टेस्ट और लगातार अभ्यास पर भरोसा किया। उनका मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, बल्कि निरंतर मेहनत ही मंजिल तक पहुंचाती है।
NEET परीक्षा में सफलता मिलने के बाद विशाल ने अपने पिता से एक भावुक वादा किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने के बाद सबसे पहले वह अपने पिता को एक कार दिलाएंगे। उनका कहना है कि उनके पिता ने पूरी जिंदगी परिवार के लिए संघर्ष किया और ऑटो चलाकर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करें और उन्हें बेहतर जीवन दें।
विशाल की इस बात ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का दिल जीत लिया है। बड़ी संख्या में लोग उनकी मेहनत और अपने पिता के प्रति सम्मान की भावना की सराहना कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे उन युवाओं के लिए प्रेरणा बताया है जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को छोड़ने का विचार करते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि धैर्य, अनुशासन और निरंतर अभ्यास से मिलती है। कई बार पहली या दूसरी कोशिश में सफलता नहीं मिलती, लेकिन लगातार प्रयास करने वाले विद्यार्थी अंततः अपनी मंजिल हासिल कर लेते हैं। विशाल तिवारी की कहानी इसका सटीक उदाहरण है।
गोरखपुर सहित पूरे प्रदेश में विशाल की सफलता की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि आर्थिक स्थिति किसी की प्रतिभा और मेहनत से बड़ी नहीं होती। यदि परिवार का साथ और खुद पर विश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
विशाल अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेकर डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उनका उद्देश्य केवल अपना करियर बनाना नहीं बल्कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करना भी है। वह चाहते हैं कि भविष्य में ऐसे मरीजों की मदद करें जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बेहतर इलाज नहीं करा पाते।
यह कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। विशाल तिवारी ने यह साबित किया है कि संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। यदि मेहनत ईमानदारी से की जाए और लक्ष्य पर पूरा ध्यान रखा जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। उनकी उपलब्धि केवल उनके परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और दृढ़ संकल्प से हर सपना पूरा किया जा सकता है।