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नोएडा में निर्माणाधीन इस्कॉन मंदिर पर चला बुलडोजर का खतरा? अथॉरिटी के नोटिस से मचा हड़कंप, प्रबंधन ने कहा- सभी दस्तावेज वैध

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में बन रहे भव्य इस्कॉन (ISKCON) मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया है। सेक्टर-151 के कामबख्शपुर गांव में निर्माणाधीन मंदिर को लेकर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्राधिकरण का आरोप है कि मंदिर परिसर में निर्धारित मानकों और आवश्यक […]

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  • June 18, 2026 11:45 pm IST, Published 1 hour ago

नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में बन रहे भव्य इस्कॉन (ISKCON) मंदिर को लेकर विवाद गहरा गया है। सेक्टर-151 के कामबख्शपुर गांव में निर्माणाधीन मंदिर को लेकर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्राधिकरण का आरोप है कि मंदिर परिसर में निर्धारित मानकों और आवश्यक स्वीकृतियों के बिना निर्माण कार्य किया जा रहा है, जबकि मंदिर प्रबंधन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि सभी जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां पहले ही संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई हैं।

यह मामला सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि यह केवल एक निर्माण विवाद नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण ने मंदिर निर्माण स्थल का निरीक्षण करने के बाद एक नोटिस जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि मंदिर परिसर में डबल बेसमेंट सहित कुछ निर्माण कार्य ऐसे पाए गए हैं, जिनके लिए आवश्यक स्वीकृति और स्वीकृत भवन मानचित्र उपलब्ध नहीं कराया गया। प्राधिकरण ने इसे भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन मानते हुए मंदिर प्रबंधन से जवाब तलब किया है।

प्राधिकरण का कहना है कि किसी भी बड़े निर्माण, विशेष रूप से धार्मिक स्थल से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। यदि निर्माण कार्य नियमों के विपरीत पाया जाता है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

मंदिर प्रबंधन ने किया पलटवार

दूसरी ओर इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने प्राधिकरण के दावों पर सवाल उठाए हैं। प्रबंधन का कहना है कि मंदिर निर्माण पूरी पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। उनका दावा है कि भवन से संबंधित नक्शा, रजिस्ट्री, तकनीकी ड्राइंग और अन्य जरूरी दस्तावेज पहले ही नोएडा प्राधिकरण को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।

मंदिर प्रबंधन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह कोई नया धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि वर्षों पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण और विस्तार किया जा रहा है। पुराने भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं और विशाल स्वरूप के साथ नए मंदिर का निर्माण शुरू किया गया था।

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

इस्कॉन संस्था देश और दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, वैदिक संस्कृति और आध्यात्मिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए जानी जाती है। नोएडा में बन रहा यह मंदिर भी भविष्य में एक बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।

मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, गौसेवा और समाजसेवा से जुड़े विभिन्न कार्य संचालित किए जाने की योजना है। यही कारण है कि इस परियोजना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा था।

स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता

ध्वस्तीकरण नोटिस की खबर सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और भक्तों में चिंता बढ़ गई है। कई श्रद्धालुओं ने मांग की है कि मामले को संवेदनशीलता के साथ देखा जाए और प्रशासन तथा मंदिर प्रबंधन के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मंदिर प्रबंधन के पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। वहीं यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी कमी पाई जाती है तो उसे नियमानुसार दूर किया जा सकता है। फिलहाल मामला नोटिस और जवाब के स्तर पर है। नोएडा प्राधिकरण मंदिर प्रबंधन की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहा है। वहीं मंदिर प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि यदि आवश्यक हुआ तो वे कानूनी रास्ता भी अपनाएंगे।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद प्राधिकरण क्या फैसला लेता है। यह विवाद केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक नियमों और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन की परीक्षा भी बन गया है।

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