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120 की रफ्तार, बिना टोल प्लाजा सफर… लेकिन देना होगा देश का सबसे महंगा टोल!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को एक और आधुनिक एक्सप्रेसवे की सौगात मिल गई है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने के साथ ही यह देश के सबसे महंगे टोल वाले एक्सप्रेसवे के रूप में चर्चा का विषय बन गया है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों को पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 15, 2026 7:30 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को एक और आधुनिक एक्सप्रेसवे की सौगात मिल गई है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने के साथ ही यह देश के सबसे महंगे टोल वाले एक्सप्रेसवे के रूप में चर्चा का विषय बन गया है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों को पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां अत्याधुनिक फ्री-फ्लो टोलिंग सिस्टम लागू किया गया है। हालांकि, बिना रुके सफर की सुविधा के बदले यात्रियों को देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे की तुलना में सबसे अधिक टोल शुल्क चुकाना होगा।

करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये निर्धारित किया गया है। इस हिसाब से प्रति किलोमीटर टोल लगभग 4.37 रुपये बैठता है, जो देश के किसी भी प्रमुख एक्सप्रेसवे से अधिक माना जा रहा है।

बिना टोल प्लाजा मिलेगा हाईटेक सफर

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं बनाए गए हैं। वाहन चालक बिना किसी रुकावट के 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम निर्धारित गति से यात्रा कर सकेंगे। टोल की वसूली फ्री-फ्लो मल्टी लेन इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग सिस्टम के माध्यम से की जाएगी। इसमें वाहनों के FASTag और कैमरों की मदद से स्वतः टोल कट जाएगा, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में देश के कई अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर भी इसी तरह की टोल व्यवस्था लागू की जा सकती है।

देश के अन्य एक्सप्रेसवे से कितना महंगा?

यदि देश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेसवे की तुलना की जाए तो लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का प्रति किलोमीटर टोल सबसे अधिक है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे – लगभग 4.37 रुपये प्रति किलोमीटर

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे – लगभग 3.39 रुपये प्रति किलोमीटर

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – लगभग 3.23 रुपये प्रति किलोमीटर

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे – लगभग 3.21 रुपये प्रति किलोमीटर

गंगा एक्सप्रेसवे – लगभग 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – लगभग 2.24 रुपये प्रति किलोमीटर

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – लगभग 2.15 रुपये प्रति किलोमीटर

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – लगभग 1.99 रुपये प्रति किलोमीटर

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह एक्सप्रेसवे प्रति किलोमीटर टोल के मामले में सबसे ऊपर है।

सफर होगा तेज और सुरक्षित

इस एक्सप्रेसवे को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। सड़क पर उच्च गुणवत्ता की पेवमेंट, आधुनिक लाइटिंग, सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन सहायता प्रणाली और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन की व्यवस्था की गई है। 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के हिसाब से सड़क की डिजाइन तैयार की गई है ताकि यात्री कम समय में सुरक्षित यात्रा पूरी कर सकें।

लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इससे दोनों शहरों के बीच व्यापार, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और अधिक आसान होगी।

व्यापार और उद्योग को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक्सप्रेसवे केवल यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि औद्योगिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। लखनऊ और कानपुर उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र हैं। तेज और बाधारहित परिवहन व्यवस्था से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी तथा माल ढुलाई पहले की तुलना में अधिक तेज होगी।

औद्योगिक निवेश, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स और परिवहन क्षेत्र को भी इससे नई गति मिलने की संभावना है।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

एक ओर लोग बिना रुके यात्रा और कम समय में गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे अधिक टोल शुल्क को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कई वाहन चालकों का मानना है कि यदि टोल दरें कुछ कम होतीं तो अधिक संख्या में लोग इस एक्सप्रेसवे का उपयोग करते।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता के निर्माण और रखरखाव की लागत को देखते हुए टोल दरें निर्धारित की जाती हैं।

FASTag रखना होगा अनिवार्य

फ्री-फ्लो टोलिंग व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए वाहन पर सक्रिय FASTag होना आवश्यक है। यदि किसी वाहन में FASTag नहीं होगा या वह निष्क्रिय होगा तो संबंधित नियमों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना लगाया जा सकता है। इसलिए यात्रा से पहले वाहन चालक अपने FASTag का बैलेंस और वैधता अवश्य जांच लें।

उत्तर प्रदेश की सड़क अवसंरचना को नई पहचान

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के बाद अब लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे राज्य के आधुनिक सड़क नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरा है। यह परियोजना न केवल यात्रा को तेज बनाएगी बल्कि राज्य के आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार के अवसरों को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

फिलहाल सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि देश का सबसे महंगा टोल देने के बावजूद यात्रियों को बिना रुके, हाईटेक और तेज रफ्तार यात्रा का अनुभव मिलेगा, जो भारत के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में एक नई शुरुआत माना जा रहा है।

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