उत्तराखंड के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा लगाए गए आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अधिकारी ने दावा किया है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों को सामने लाने के बाद उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) की ग्रेडिंग अनुचित तरीके से कम कर दी गई।
मामले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Central Administrative Tribunal (CAT) ने संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। याचिका में कहा गया है कि ग्रेडिंग में की गई कटौती के पीछे कोई ठोस आधार नहीं था और यह कार्रवाई पूर्वाग्रहपूर्ण मंशा के तहत की गई।
अधिकारी का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष कई कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उजागर किया था। इसके बाद उनके सेवा रिकॉर्ड को प्रभावित करने की कोशिश की गई। वहीं, मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
अब CAT के समक्ष जवाब दाखिल होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि ग्रेडिंग में बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या फिर आरोपों के अनुसार इसके पीछे कोई अन्य कारण था। इस मामले पर प्रशासनिक और कर्मचारी संगठनों की भी नजर बनी हुई है।