कोलकाता में ममता बनर्जी की डिजाइन की गई मूर्ति पर चला बुलडोज़र

शुभेंदु अधिकारी ने शपथ के बाद ही किया था ऐलान कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित मूर्ति को शनिवार सुबह हटा दिया गया है। भाजपा सरकार […]

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  • May 23, 2026 8:37 pm IST, Published 1 minute ago

शुभेंदु अधिकारी ने शपथ के बाद ही किया था ऐलान

कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई विवादित मूर्ति को शनिवार सुबह हटा दिया गया है। भाजपा सरकार के आते ही इस ढांचे को गिराने की कार्रवाई की गई है, जिसके बाद से राज्य में सियासी सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गई है।

शुभेंदु अधिकारी ने पूरा किया अपना वादा

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने शपथ ग्रहण के अगले ही दिन साफ कर दिया था कि इस मूर्ति को जल्द ही गिरा दिया जाएगा। शनिवार सुबह जब लोग स्टेडियम के वीवीआईपी (VVIP) गेट के पास पहुंचे, तो वहां मूर्ति का टूटा हुआ हिस्सा जमीन पर गिरा मिला।

फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप के दौरान बनी थी मूर्ति

  • कब लगी थी: इस मूर्ति को साल 2017 में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप से ठीक पहले स्थापित किया गया था।

  • क्या था खास: इस मूर्ति में एक खिलाड़ी के दो पैर और उसकी कमर के ऊपर एक बड़ी फुटबॉल बनी हुई थी। इसके साथ ही इस पर पिछली टीएमसी (TMC) सरकार का ‘विश्व बांग्ला’ लोगो भी लगा हुआ था और नीचे ममता बनर्जी का नाम अंकित था।

  • स्टेडियम का कायाकल्प: 2017 में इस वर्ल्ड कप से पहले पूरे साल्ट लेक स्टेडियम को करीब ₹100 करोड़ की लागत से रेनोवेट और अपडेट किया गया था।

खेल मंत्री बोले- ‘बदसूरत और बेमतलब का ढांचा’

इस कार्रवाई पर बयान देते हुए पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि इस बदसूरत और बेमतलब के ढांचे का साल्ट लेक स्टेडियम जैसी खूबसूरत और ऐतिहासिक जगह से कोई मेल नहीं था। यह शुरुआत से ही विवादों में रही थी और खेल के स्तर को सही तरीके से बयां नहीं करती थी।

बड़ी बात: इस मूर्ति को हटाए जाने के बाद अब टीएमसी और भाजपा के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा होना तय माना जा रहा है। टीएमसी इसे बदले की राजनीति बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्टेडियम के सौंदर्यीकरण और सही खेल भावना की बहाली से जोड़कर देख रही है।

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