दिल्ली हाई कोर्ट की कड़ी फटकार

सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के चिकित्सा उपकरण बेकार पड़े रहने पर जताई नाराजगी, मांगा पूरा ब्योरा नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए महंगे चिकित्सा उपकरणों के वर्षों तक इस्तेमाल न होने और बेकार पड़े रहने पर गंभीर चिंता और कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत […]

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  • July 9, 2026 7:45 am IST, Published 2 hours ago

सरकारी अस्पतालों में करोड़ों के चिकित्सा उपकरण बेकार पड़े रहने पर जताई नाराजगी, मांगा पूरा ब्योरा

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए महंगे चिकित्सा उपकरणों के वर्षों तक इस्तेमाल न होने और बेकार पड़े रहने पर गंभीर चिंता और कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने इसे जनता की गाढ़ी कमाई और सार्वजनिक पैसों की भारी बर्बादी करार दिया है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की विशेष पीठ ने दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों को अपने परिसरों में मौजूद ऐसे सभी अप्रयुक्त (unused) उपकरणों का अनिवार्य रूप से ऑडिट करने और एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह आदेश तब सामने आया जब दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) की ओर से अदालत को बताया गया कि पीईटी स्कैन में इस्तेमाल होने वाली 15.42 करोड़ रुपये की लागत वाली पीईटी साइक्लोट्रान (PET Cyclotron) मशीन विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक मंजूरियों (Licensing) के अभाव में वर्षों से बंद पड़ी है।

न्यायमित्र (Amicus Curiae) अशोक अग्रवाल ने अदालत को जानकारी दी कि यह मशीन सितंबर 2017 में स्थापित की गई थी, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते यह अप्रैल 2022 से पूरी तरह बंद है। स्थिति यह है कि इसका लाइसेंस भी फरवरी 2024 में समाप्त हो चुका है और अब तक उसे नवीनीकृत (Renew) भी नहीं कराया गया है। जनता के पैसों से खरीदी गई इतनी महंगी मशीन का उपयोग न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

5 दिन के भीतर देनी होगी रिपोर्ट

हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  • शपथपत्र दाखिल करना: दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों (Medical Superintendents) को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र दाखिल करना होगा।

  • ब्योरा देना होगा: रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि कौन-कौन से उपकरण वर्तमान में उपयोग में नहीं हैं, उनकी खरीद कब और कितनी लागत से की गई थी, उनका मूल उद्देश्य क्या था और वे अब तक किस वजह से चालू नहीं किए जा सके।

  • समयसीमा: यह पूरी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम पांच दिन पहले अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।

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