गोरखपुर/लखनऊ। पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने मूक-बधिर और श्रवण बाधित यात्रियों की सुविधा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारतीय रेलवे के इतिहास में पहली बार लखनऊ मंडल के बादशाहनगर स्टेशन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ‘सांकेतिक भाषा ट्रेन सूचना प्रणाली’ (Sign Language Train Information System) की शुरुआत कर दी गई है, और जल्द ही गोरखपुर में भी इसे लगाने की तैयारी है।
सीधे एलईडी स्क्रीन पर सूचना: इस नई तकनीक के माध्यम से ट्रेनों के आगमन-प्रस्थान, प्लेटफॉर्म में बदलाव (प्लेटफॉर्म परिवर्तन) और अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएँ अब सीधे एलईडी स्क्रीन पर सांकेतिक भाषा में प्रदर्शित होंगी।
आत्मनिर्भरता: ऑडियो घोषणाओं के स्वतः सांकेतिक भाषा में बदलने से मूक-बधिर यात्रियों को अब जानकारी के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
रियल-टाइम कन्वर्जन: यह प्रणाली रेलवे की मौजूदा ऑडियो घोषणा प्रणाली से जुड़ी हुई है जो वास्तविक समय (रियल-टाइम) में घोषणाओं को सांकेतिक भाषा में बदलती है।
मार्गदर्शन: इस अभिनव प्रणाली को लखनऊ मंडल के सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग द्वारा मंडल रेल प्रबंधक गौरव अग्रवाल के मार्गदर्शन और वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर वैभव श्रीवास्तव के निर्देशन में विकसित किया गया है।
सफल ट्रायल: जनसंपर्क अधिकारी महेश गुप्ता के अनुसार, इस तकनीक का दो महीने तक सफल परीक्षण किया गया है।
विशेषज्ञों की देखरेख: इस ट्रायल के दौरान लखनऊ मंडल के अधिकारियों के साथ-साथ नोएडा स्थित मूक-बधिर संस्था के प्रतिनिधियों और चार प्रमाणित सांकेतिक भाषा इंटरप्रेटर्स (Sign Language Interpreters) ने इसकी कार्यक्षमता का बारीकी से परीक्षण किया।
सफल परीक्षण के बाद बादशाहनगर स्टेशन पर लागू यह आधुनिक तकनीक रेलवे की उस समावेशी सोच को दर्शाती है, जिसके तहत हर यात्री को समान सुविधा और सम्मानजनक यात्रा का अधिकार सुनिश्चित किया जा रहा है।