• होम
  • दिल्ली/NCR
  • मोबाइल ऐप से ATM हैकिंग का सच, जानें वायरल दावे की हकीकत

मोबाइल ऐप से ATM हैकिंग का सच, जानें वायरल दावे की हकीकत

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक विशेष मोबाइल ऐप की मदद से एटीएम (ATM) मशीन को पहले बंद किया जाता है और फिर दोबारा चालू किया जाता है। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों के मन में […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 9, 2026 7:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक विशेष मोबाइल ऐप की मदद से एटीएम (ATM) मशीन को पहले बंद किया जाता है और फिर दोबारा चालू किया जाता है। वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या वास्तव में कोई मोबाइल ऐप एटीएम मशीन को नियंत्रित कर सकता है? क्या इससे बैंकिंग व्यवस्था और ग्राहकों की जमा पूंजी को खतरा हो सकता है? इस वायरल दावे को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकारों ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

दरअसल, वायरल वीडियो में दो लोग एटीएम मशीन के सामने खड़े दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल ऐप का उपयोग करता हुआ नजर आता है, जिसके बाद कुछ ही सेकंड में एटीएम मशीन की स्क्रीन बंद हो जाती है। फिर थोड़ी देर बाद मशीन दोबारा चालू हो जाती है। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि यह मोबाइल ऐप किसी भी एटीएम को दूर से नियंत्रित कर सकता है। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बैंक के एटीएम को केवल मोबाइल ऐप के माध्यम से बंद या चालू करना सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं है। एटीएम मशीनें अत्यधिक सुरक्षित नेटवर्क, एन्क्रिप्शन और बैंकिंग सर्वर से जुड़ी होती हैं। इनके संचालन के लिए कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है। यदि किसी मशीन में तकनीकी खराबी, बिजली की समस्या या नेटवर्क में व्यवधान हो तो वह स्वतः बंद या रीस्टार्ट हो सकती है, लेकिन केवल मोबाइल ऐप के जरिए ऐसा करना बेहद कठिन और असामान्य माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार वायरल वीडियो कई परिस्थितियों में भ्रामक भी हो सकता है। संभव है कि वीडियो में दिखाई गई घटना पहले से तय हो या मशीन का तकनीकी परीक्षण चल रहा हो। कई बार एटीएम के रखरखाव (Maintenance) के दौरान इंजीनियर मशीन को रीस्टार्ट करते हैं, जिसे सामान्य व्यक्ति मोबाइल ऐप से नियंत्रित किया जाना समझ सकता है। ऐसे वीडियो बिना पूरी जानकारी के सोशल मीडिया पर वायरल होकर भ्रम की स्थिति पैदा कर देते हैं।

बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि एटीएम मशीनों में सुरक्षा के कई स्तर मौजूद होते हैं। इनमें सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम, एन्क्रिप्टेड नेटवर्क, हार्डवेयर सुरक्षा मॉड्यूल (HSM), रिमोट मॉनिटरिंग और लगातार निगरानी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। यदि कोई अनधिकृत गतिविधि होती है तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित बैंक और निगरानी प्रणाली तक पहुंच जाती है।

साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को भ्रमित करने के लिए अक्सर ऐसे वीडियो और संदेश सोशल मीडिया पर साझा किए जाते हैं। कई बार इनका उद्देश्य लोगों में डर पैदा करना या किसी फर्जी ऐप को डाउनलोड करवाना भी हो सकता है। इसलिए किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने या उसकी अनुमति (Permissions) देने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि यदि सोशल मीडिया पर इस तरह का कोई वीडियो या दावा दिखाई दे तो उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना उसे साझा न करें। यदि किसी बैंक या एटीएम से संबंधित संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तुरंत संबंधित बैंक की हेल्पलाइन, स्थानीय शाखा या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विभिन्न बैंक समय-समय पर ग्राहकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करते रहते हैं। बैंक कभी भी ग्राहकों से ओटीपी, पिन, पासवर्ड, सीवीवी या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी फोन, ईमेल या मैसेज के माध्यम से साझा करने के लिए नहीं कहते। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बैंक अधिकारी बताकर ऐसी जानकारी मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की जागरूकता भी सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। मोबाइल में केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही बैंकिंग ऐप डाउनलोड करें और किसी थर्ड पार्टी लिंक या संदिग्ध वेबसाइट पर भरोसा न करें।

फिलहाल वायरल वीडियो में किए जा रहे दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि केवल मोबाइल ऐप के जरिए किसी भी एटीएम मशीन को बंद या चालू किया जा सकता है। इसलिए लोगों को सलाह दी जाती है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट जानकारियों पर आंख बंद करके विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें। डिजिटल युग में सतर्कता, जागरूकता और साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन ही ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

Advertisement