लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल और डीजल की चोरी कर उसमें मिलावटी पदार्थ मिलाकर बेचने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से चल रहे गुप्त अभियान के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मौके से करीब 16 हजार लीटर से अधिक पेट्रोल-डीजल, नकली एथेनॉल (सॉल्वेंट), कई टैंकर, ड्रम और ईंधन चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह टैंकरों से पेट्रोल और डीजल चोरी करता था। इसके बाद चोरी किए गए ईंधन में खुद तैयार किया गया नकली एथेनॉल अथवा अन्य खतरनाक सॉल्वेंट मिलाकर उसे दोबारा बाजार में बेच दिया जाता था। इस मिलावटी ईंधन से वाहन चालकों को भारी आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ इंजन खराब होने का भी खतरा बना रहता था।
‘ऑपरेशन एथेनॉल शील्ड’ के तहत हुई कार्रवाई
क्राइम ब्रांच ने इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन एथेनॉल शील्ड’ नाम दिया था। लगातार मिल रही शिकायतों और वाहनों में अचानक बढ़ रही तकनीकी खराबियों के बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। कई दिनों तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के बाद टीम ने मलिहाबाद क्षेत्र के संन्यासी बाग फ्लाईओवर के पास छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने चार लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। यहां बड़ी मात्रा में पेट्रोल, डीजल, रासायनिक सॉल्वेंट, प्लास्टिक ड्रम, पाइप, पंप मशीनें तथा अन्य उपकरण बरामद हुए। पुलिस ने पूरे परिसर को सील कर दिया।
टैंकर चालकों की मिलीभगत का खुलासा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कुछ टैंकर चालक रास्ते में ही पेट्रोल और डीजल निकालकर गिरोह के सदस्यों को बेच देते थे। गिरोह के सदस्य चोरी किए गए ईंधन में नकली एथेनॉल और अन्य रसायन मिलाकर उसे दोबारा बाजार में बेचते थे।
पुलिस का मानना है कि इस अवैध कारोबार में कई अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। इसलिए गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
आबकारी विभाग भी जांच में शामिल
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आबकारी विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया। संयुक्त जांच में अवैध भंडारण और ईंधन में मिलावट की पुष्टि हुई। बरामद पेट्रोल और डीजल के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि ईंधन में किन-किन रसायनों का इस्तेमाल किया गया था और उसकी गुणवत्ता कितनी खराब थी।
वाहनों को होता है भारी नुकसान
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल या डीजल में मिलावट होने से इंजन की कार्यक्षमता तेजी से प्रभावित होती है। इससे इंजन में कार्बन जमा होना, फ्यूल इंजेक्टर खराब होना, माइलेज कम होना और इंजन सीज होने जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विशेष रूप से नकली एथेनॉल या खतरनाक सॉल्वेंट मिलाने से इंजन के धातु वाले हिस्सों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसे ईंधन का उपयोग करने से वाहन मालिकों को लाखों रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
काफी समय से चल रही थी निगरानी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ महीनों से विभिन्न जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पेट्रोल भरवाने के बाद वाहनों में असामान्य तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने गोपनीय तरीके से जांच शुरू की।
तकनीकी निगरानी, मुखबिरों की सूचना और लगातार सर्विलांस के आधार पर इस पूरे गिरोह का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे भी कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
गिरोह का नेटवर्क कई जिलों तक फैला होने की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि गिरोह केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था। पुलिस को आशंका है कि इसका नेटवर्क आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ है। पूछताछ के आधार पर अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जा सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि मिलावटी ईंधन किन पेट्रोल पंपों या स्थानीय कारोबारियों तक पहुंचाया जा रहा था।
पुलिस की अपील
पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत और विश्वसनीय पेट्रोल पंपों से ही ईंधन भरवाएं। यदि ईंधन भरवाने के बाद वाहन के प्रदर्शन में अचानक गिरावट, इंजन की आवाज में बदलाव या अन्य तकनीकी समस्या महसूस हो तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दें।
अधिकारियों का कहना है कि मिलावटी ईंधन के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए विशेष अभियान आगे भी जारी रहेगा। दोषियों के खिलाफ पेट्रोलियम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।