नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 2028-29 अवधि के लिए अस्थायी सदस्यता हासिल करने की अपनी दावेदारी औपचारिक रूप से प्रस्तुत कर दी है। विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की उम्मीदवारी रखते हुए कहा कि देश वैश्विक शांति, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूतकरने के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएगा।
भारत का कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों, अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के समर्थन में हमेशा खड़ा रहा है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, सतत विकास और मानवीय सहायता जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत ने लगातार रचनात्मक योगदान दिया है। इसी अनुभव के आधार पर भारत ने सुरक्षा परिषद में फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की इच्छा जताई है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं, जबकि 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। इन अस्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर किया जाता है। भारत इससे पहले भी कई बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है और वर्ष 2021-22 के दौरान भी उसने परिषद में अपनी जिम्मेदारियां निभाई थीं।
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सहयोग, संवाद और सभी देशों की समान भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। भारत का मानना है कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए व्यापक सुधारों की भी जरूरत है।
भारत की उम्मीदवारी ऐसे समय में सामने आई है, जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, संघर्ष, ऊर्जा, जलवायु और आर्थिक स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। ऐसे में यदि भारत को 2028-29 के लिए अस्थायी सदस्यता मिलती है, तो वह इन विषयों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने और विकासशील देशों के हितों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेगा।
अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाली चुनाव प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी, जहां सदस्य देशों के समर्थन के आधार पर 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यों का चयन किया जाएगा।