• होम
  • महाराष्ट्र
  • सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्ति पर NCP में विवाद

सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्ति पर NCP में विवाद

नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद सामने आया है। पार्टी नेता सचिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे पार्टी के संविधान और निर्धारित नियमों के विपरीत बताया है। उन्होंने इस मामले में पार्टी नेतृत्व को कानूनी नोटिस […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 11:30 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद सामने आया है। पार्टी नेता सचिदानंद सिंह ने सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे पार्टी के संविधान और निर्धारित नियमों के विपरीत बताया है। उन्होंने इस मामले में पार्टी नेतृत्व को कानूनी नोटिस भेजते हुए नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है।

नोटिस में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुरूप होनी चाहिए। उनका कहना है कि संगठन के नियमों का पालन किए बिना किसी भी नियुक्ति को वैध नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

साल 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में हुए बड़े राजनीतिक विभाजन के बाद अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट ने अलग संगठनात्मक ढांचा तैयार किया था। उसी समय चुनाव आयोग ने अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक NCP के रूप में मान्यता दी थी, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाला गुट अलग राजनीतिक पहचान के साथ सक्रिय हो गया। दोनों गुटों के बीच संगठन और नेतृत्व को लेकर लगातार राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में सुनेत्रा पवार की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने पार्टी के भीतर नई बहस को जन्म दिया है। विरोध करने वाले नेताओं का कहना है कि संगठनात्मक निर्णय पूरी पारदर्शिता और संविधान के अनुसार होने चाहिए, ताकि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम पैदा न हो।

हालांकि, पार्टी की ओर से इस कानूनी नोटिस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट कर सकता है। यदि विवाद बढ़ता है तो इसका असर संगठन की आंतरिक एकजुटता और राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।

शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट और अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट के बीच पहले से चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच यह नया विवाद संगठनात्मक मुद्दों को और प्रमुखता दे सकता है। ऐसे समय में जब दोनों गुट अपने-अपने जनाधार को मजबूत करने में जुटे हैं, नेतृत्व से जुड़े विवादों पर सभी की नजर बनी हुई है।

Advertisement