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पब्लिक प्लेस पर पोर्न देखने पर रोक की मांग वाली याचिका खारिज 

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों (पब्लिक प्लेस) पर पोर्नोग्राफी देखने पर रोक लगाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानूनी मामला नहीं बल्कि नीतिगत (पॉलिसी) विषय है, जिस पर फैसला केंद्र सरकार और विषय विशेषज्ञों को लेना […]

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Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 6:59 am IST, Published 60 minutes ago

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों (पब्लिक प्लेस) पर पोर्नोग्राफी देखने पर रोक लगाने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह कानूनी मामला नहीं बल्कि नीतिगत (पॉलिसी) विषय है, जिस पर फैसला केंद्र सरकार और विषय विशेषज्ञों को लेना चाहिए।

अदालत की मुख्य टिप्पणियां

याचिकाकर्ता के दावे और याचिका के मुख्य बिंदु

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार को विशेषकर नाबालिगों के बीच पोर्नोग्राफी की पहुंच रोकने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

  • याचिका के आंकड़े और दावे:

    • इंटरनेट पर हर सेकंड 5,000 पोर्न साइट्स देखी जाती हैं।

    • इंटरनेट के जरिए 2 करोड़ से ज्यादा पोर्न वीडियो या क्लिप्स जारी किए जा रहे हैं।

    • अश्लील सामग्री आसानी से उपलब्ध होने के कारण इसकी लत बढ़ रही है, जिससे यौन अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है।

  • कानूनी हवाला: याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का हवाला देते हुए कहा गया था कि केंद्र सरकार के पास आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित करने की शक्ति है।

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