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ज्ञानवापी विवाद में नहीं बनी सहमति, अब अदालत के फैसले पर टिकी सबकी नजर

वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी। मंगलवार को मध्यस्थता न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद—दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि वे आपसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं और अब इस मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय […]

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gyanvapi masjid
Gauravshali Bharat News
  • July 14, 2026 4:35 pm IST, Published 1 hour ago

वाराणसी: ज्ञानवापी परिसर से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी। मंगलवार को मध्यस्थता न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद—दोनों पक्षों ने स्पष्ट कर दिया कि वे आपसी समझौते के पक्ष में नहीं हैं और अब इस मामले का अंतिम निर्णय न्यायालय से ही चाहते हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शुरू हुई मध्यस्थता प्रक्रिया बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई।

सुनवाई के दौरान विवाद से संबंधित चार अलग-अलग पत्रावलियों पर चर्चा हुई। सभी संबंधित पक्ष न्यायालय में उपस्थित हुए और उन्होंने अपने-अपने पक्ष को विस्तार से रखा। हालांकि बातचीत के बाद भी किसी प्रकार का साझा समाधान नहीं निकल सका। दोनों पक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने दावों पर कायम हैं और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही अंतिम निर्णय स्वीकार करेंगे।

मंदिर पक्ष ने अपने दावे को दोहराते हुए कहा कि विवादित परिसर प्राचीन मंदिर का हिस्सा है और वहां पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए। पक्षकारों की ओर से यह भी कहा गया कि परिसर के तलगृह में पूजा पहले से जारी है और उनका मानना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से मंदिर से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक आधार पर उनके दावे को अदालत में रखा जा रहा है और वे न्यायिक फैसले की प्रतीक्षा करेंगे।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि और अधिवक्ता भी मध्यस्थता की प्रक्रिया में शामिल हुए। इससे पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि मुस्लिम पक्ष इस प्रक्रिया का बहिष्कार कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुनवाई में शामिल होकर उन्होंने भी अपना पक्ष रखा और स्पष्ट किया कि वे भी किसी समझौते के बजाय अदालत के निर्णय को ही अंतिम मानेंगे।

ज्ञानवापी परिसर को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद जारी है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह स्थल आदि विश्वेश्वर मंदिर का हिस्सा है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह मस्जिद वक्फ संपत्ति है और वर्षों से यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं। इसी विवाद को लेकर विभिन्न अदालतों में कई याचिकाएं लंबित हैं।

मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण को भी दोनों पक्ष अलग-अलग तरीके से देख रहे हैं। मंदिर पक्ष का दावा है कि सर्वे में मंदिर से जुड़े अवशेषों के संकेत मिले हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज करा चुका है। साथ ही मुस्लिम पक्ष पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए अपने कानूनी तर्क प्रस्तुत करता रहा है। फिलहाल यह मामला वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न न्यायिक मंचों पर विचाराधीन है। मध्यस्थता के असफल रहने के बाद अब आगे की दिशा अदालतों की सुनवाई और उनके आदेशों पर निर्भर करेगी।

 

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