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कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि, राजनाथ सिंह ने रवाना की ‘शौर्य विजय यात्रा’

नई दिल्ली: कारगिल विजय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी से एक विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ की शुरुआत हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक जाने वाली इस मोटरसाइकिल […]

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  • July 14, 2026 5:29 pm IST, Published 42 minutes ago

नई दिल्ली: कारगिल विजय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी से एक विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ की शुरुआत हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक जाने वाली इस मोटरसाइकिल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान भारतीय सेना के उन वीर जवानों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को समर्पित है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।

13 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में 28 बाइक सवार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके परिवारों के सदस्य शामिल हैं। यह दल लगभग 1,900 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए उत्तर भारत के कठिन पर्वतीय मार्गों से होकर गुजरेगा और 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि कारगिल युद्ध केवल एक सैन्य विजय नहीं, बल्कि भारत के अटूट साहस, राष्ट्रीय स्वाभिमान और संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई और अत्यंत कठिन मौसम में जिस वीरता का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने दोहराया कि भारत अपनी भूमि, सम्मान और संप्रभुता पर किसी भी चुनौती का पूरी ताकत से जवाब देने में सक्षम है।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के परम वीर चक्र विजेताओं—कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव और सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) संजय कुमार को विशेष रूप से याद करते हुए उनके साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन वीर सैनिकों की गाथाएं युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’ थीम पर आधारित इस यात्रा के दौरान प्रतिभागी चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक जैसे कई ऐतिहासिक सैन्य स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। साथ ही, वे शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं से मुलाकात कर उनके योगदान और साहस का सम्मान भी करेंगे।

इस यात्रा की एक विशेष पहचान यह भी है कि बाइक सवार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा एक कलश अपने साथ लेकर चल रहे हैं। कारगिल पहुंचने पर इस मिट्टी को वहां के युद्ध स्मारक पर अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने इसे वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और शहीदों के बलिदान के बीच एक भावनात्मक सेतु बताया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और पृष्ठभूमियों से आए प्रतिभागी यह संदेश दे रहे हैं कि राष्ट्र सर्वोपरि है और तिरंगे के सम्मान के लिए पूरा देश एकजुट है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटों की भी उपस्थिति रही। रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि इस प्रकार के अभियान युवाओं में देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता केवल सीमाओं की रक्षा से नहीं, बल्कि शहीदों के बलिदान को याद रखने और उनके आदर्शों को अपनाने से भी सुरक्षित रहती है। इस अवसर पर रक्षा प्रमुख जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। भारतीय सेना का यह अभियान कारगिल युद्ध के अमर नायकों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ नई पीढ़ी में राष्ट्रसेवा की भावना को सशक्त बनाने का प्रयास माना जा रहा है।

 

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