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क्या है साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड (PFA)? मानसिक तनाव और चिंता से जूझ रहे लोगों के लिए कैसे है मददगार

नई दिल्ली: बदलते मौसम, खासकर गर्मियों के दौरान, जहां शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। तेज गर्मी, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और दैनिक जीवन के तनाव कई लोगों में चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। ऐसे समय में ‘साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड’ (Psychological […]

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Gauravshali Bharat News
  • April 23, 2026 11:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली: बदलते मौसम, खासकर गर्मियों के दौरान, जहां शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, वहीं मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। तेज गर्मी, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और दैनिक जीवन के तनाव कई लोगों में चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। ऐसे समय में ‘साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड’ (Psychological First Aid – PFA) एक बेहद उपयोगी और प्रभावी तरीका माना जाता है।

World Health Organization के अनुसार, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड एक सरल और मानवीय तरीका है, जिसके जरिए संकट या तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे लोगों को तुरंत मानसिक और भावनात्मक सहारा दिया जाता है। यह कोई दवा, काउंसलिंग या मेडिकल थेरेपी नहीं है, बल्कि एक सहायक प्रतिक्रिया (supportive response) है जो व्यक्ति को सुरक्षित, शांत और आशावान महसूस कराने में मदद करती है।

PFA का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को भावनात्मक रूप से स्थिर करना और उसे यह एहसास दिलाना है कि वह अकेला नहीं है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका ‘सुनने’ और ‘समझने’ की होती है। जब कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है, तो उसे सलाह देने से ज्यादा जरूरत होती है कि कोई उसकी बात बिना टोके सुने और उसकी भावनाओं को समझे।

गर्मियों में कई लोग अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं का सामना करते हैं। इन परिस्थितियों में साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड तुरंत राहत देने में मदद करता है और लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में सहायक साबित होता है।

अब सवाल उठता है कि PFA क्यों जरूरी है? जब कोई व्यक्ति मानसिक संकट में होता है, तो उसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है सुरक्षा, समर्थन और जुड़ाव की। साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड इन तीनों पहलुओं पर काम करता है। यह व्यक्ति को शांत करता है, उसकी चिंता कम करता है और उसे आगे की मदद लेने के लिए तैयार करता है।

साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड देना कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है। कोई भी व्यक्ति थोड़ी समझ और संवेदनशीलता के साथ यह सहायता दे सकता है। इसके लिए कुछ जरूरी कदम अपनाए जा सकते हैं—

  • सबसे पहले व्यक्ति की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों जैसे पानी, छाया और आराम का ध्यान रखें।
  • उसकी बात ध्यान से और बिना टोके सुनें।
  • उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और उसे जज न करें।
  • उसे भरोसा दिलाएं कि वह अकेला नहीं है और मदद उपलब्ध है।
  • जरूरत पड़ने पर उसे प्रोफेशनल मदद या मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।

यह जरूरी है कि मदद करने वाला व्यक्ति खुद शांत और धैर्यवान रहे, ताकि वह सामने वाले को भी स्थिरता का एहसास करा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार के सदस्य, दोस्त, शिक्षक और समाज के अन्य लोग आसानी से PFA की बुनियादी समझ लेकर अपने आसपास के लोगों की मदद कर सकते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में अगर कोई व्यक्ति तनावग्रस्त या परेशान दिखे, तो तुरंत उसे भावनात्मक समर्थन देना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।

कुल मिलाकर, साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी तरीका है, जो मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और संकट की स्थिति में लोगों को संभालने में अहम भूमिका निभाता है।

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