वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

 कहा- हर नागरिक की जान कीमती; रोजाना मेडिकल जांच के निर्देश नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार […]

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  • July 16, 2026 12:28 pm IST, Published 25 minutes ago

 कहा- हर नागरिक की जान कीमती; रोजाना मेडिकल जांच के निर्देश

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि हर नागरिक का जीवन अमूल्य है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए और यदि स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें तुरंत आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

याचिका में उठाई गई मांगें

यह मामला राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया कि यदि भूख हड़ताल जारी रही तो वांगचुक की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसलिए उन्हें तत्काल इमरजेंसी उपचार, जीवनरक्षक चिकित्सा और आवश्यक पोषण उपलब्ध कराया जाए।

याचिका में यह भी मांग की गई कि सरकार आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर वांगचुक से बातचीत शुरू करे और जरूरत पड़ने पर अदालत फोर्स-फीडिंग (जबरन भोजन देने) की अनुमति पर भी विचार करे।

सरकार ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकारी डॉक्टर लगातार सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत उचित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।

स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता

वांगचुक के समर्थन में काम कर रहे संगठन CJP के अनुसार, 18 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन करीब 8.9 किलोग्राम घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। संगठन का कहना है कि उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

डॉक्टरों के अनुसार हालिया जांच में उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि वह पूरी तरह होश में हैं, लेकिन लंबे समय से सिर्फ पानी के सहारे अनशन करने का उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।

समर्थकों ने सरकार पर लगाए आरोप

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को लेकर चुप्पी साधे हुए है और उसका रवैया संवेदनहीन है। वहीं अमेरिका स्थित संगठन हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी प्रधानमंत्री से प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाने की अपील की है।

पहले भी रहे विवादों में

सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन कर चुके हैं। वर्ष 2025 में लेह में हुई हिंसा के बाद उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगे थे और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेजा गया था।

फिलहाल उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को सतर्क रहने और नियमित स्वास्थ्य निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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