प्रयागराज। सावन माह की शुरुआत से पहले प्रयागराज स्थित प्रसिद्ध श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य मंदिर की धार्मिक मर्यादा, स्वच्छता और सनातन परंपराओं का संरक्षण करना है। नए निर्देशों के अनुसार अब श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश के लिए पारंपरिक व शालीन वस्त्र पहनने होंगे। पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनकर ही गर्भगृह में अभिषेक की अनुमति दी जाएगी। वहीं जींस, टी-शर्ट या अन्य आधुनिक परिधानों में आने वाले श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलेगा।
मंदिर प्रशासन ने केवल ड्रेस कोड ही नहीं, बल्कि प्लास्टिक के उपयोग पर भी सख्ती दिखाई है। अब कोई भी श्रद्धालु पॉलीथिन, प्लास्टिक के गिलास या पैकेट में दूध लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे मंदिर परिसर में बढ़ते प्लास्टिक कचरे पर रोक लगेगी और धार्मिक स्थल की स्वच्छता बनी रहेगी।
सावन की तैयारियों के बीच लिया गया निर्णय
जानकारी के अनुसार सावन महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में मंदिर प्रशासन ने यह फैसला लिया। बैठक में मंदिर के महंत, पुजारियों और प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि भगवान शिव का पूजन शास्त्रीय परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप होना चाहिए। इसी उद्देश्य से ड्रेस कोड और प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने का निर्णय लिया गया।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि सावन के दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए आते हैं। ऐसे में व्यवस्था बनाए रखना, स्वच्छता सुनिश्चित करना और धार्मिक परंपराओं का पालन कराना आवश्यक है।
प्लास्टिक के दूध पैकेट और गिलास पर पूरी तरह रोक
नए नियमों के तहत श्रद्धालु अब प्लास्टिक के पैकेट या डिस्पोजेबल गिलास में दूध लेकर मंदिर नहीं जा सकेंगे। यदि कोई श्रद्धालु ऐसे सामान के साथ पहुंचेगा तो उसे मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से स्टील, तांबे या अन्य पारंपरिक पात्रों में दूध और जल लेकर आने की अपील की है।
मंदिर प्रबंधन का कहना है कि पूजा के बाद कई श्रद्धालु प्लास्टिक का कचरा परिसर में छोड़ देते हैं, जिससे सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए इस बार प्लास्टिक मुक्त मंदिर अभियान पर विशेष जोर दिया जाएगा।
सीसीटीवी और स्वयंसेवकों की रहेगी निगरानी
मंदिर प्रशासन ने बताया कि पूरे मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक प्रवेश द्वार पर स्वयंसेवकों की तैनाती रहेगी, जो श्रद्धालुओं की पूजा सामग्री और ड्रेस कोड की जांच करेंगे।
यदि कोई श्रद्धालु निर्धारित नियमों का पालन नहीं करता है तो उसे गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सामान्य दर्शन के संबंध में स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगा।
सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होंगे नियम
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू होंगे। चाहे कोई सामान्य भक्त हो या कोई विशिष्ट अथवा प्रभावशाली व्यक्ति, सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। किसी को भी विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
प्रबंधन का कहना है कि धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे मंदिर आने से पहले नए दिशा-निर्देशों की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सावन में उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
मनकामेश्वर महादेव मंदिर प्रयागराज के प्रमुख शिवालयों में शामिल है। सावन के पूरे महीने यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। सोमवार, शिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर प्रशासन हर वर्ष सुरक्षा, स्वच्छता और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था करता है।
इस बार ड्रेस कोड और प्लास्टिक प्रतिबंध को भी उसी व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक परंपराओं के सम्मान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समय की आवश्यकता है।
श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील
मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे मंदिर आने से पहले निर्धारित नियमों का पालन करें। पारंपरिक वस्त्र पहनकर आएं, प्लास्टिक सामग्री का उपयोग न करें और मंदिर परिसर को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें। प्रशासन का कहना है कि सभी भक्तों के सहयोग से ही सावन महोत्सव को शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सकेगा।
नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। मंदिर प्रशासन समय-समय पर नियमों में परिवर्तन या अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।