नई दिल्ली: संसद के आगामी सत्र में संभावित परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के रुख को लेकर नए संकेत सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल किसी भी पक्ष में खुलकर जाने के बजाय विधेयक का अंतिम मसौदा संसद में पेश होने का इंतजार कर रही है। इसके बाद ही पार्टी अपनी आधिकारिक रणनीति तय करेगी।
सूत्रों के अनुसार, DMK का मानना है कि किसी भी संवैधानिक संशोधन या परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर निर्णय लेने से पहले उसके सभी प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन जरूरी है। इसलिए पार्टी ने अभी समर्थन या विरोध का अंतिम फैसला नहीं लिया है। पार्टी का कहना है कि संसद में विधेयक पेश होने के बाद उसकी कानूनी, संवैधानिक और राजनीतिक समीक्षा की जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि परिसीमन प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रावधान शामिल होता है, तो DMK उस स्थिति में अपना अलग रुख अपना सकती है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए अंतिम स्थिति विधेयक की वास्तविक भाषा और प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि DMK का संभावित रुख विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है। यदि पार्टी कांग्रेस से अलग लाइन अपनाती है तो विपक्ष की रणनीति पर असर पड़ सकता है। हालांकि कांग्रेस और DMK दोनों दलों ने सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कोई संयुक्त या अलग आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
परिसीमन का मुद्दा केवल सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या के आधार पर संसदीय संतुलन और भविष्य की राजनीतिक संरचना से भी जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि दक्षिण भारत के कई दल इस विषय पर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं।
संसद का मानसून सत्र इस लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। यदि सरकार परिसीमन से जुड़ा विधेयक पेश करती है तो केवल सत्ता पक्ष ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की रणनीति भी चर्चा का केंद्र होगी। ऐसे में DMK का अंतिम रुख राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला साबित हो सकता है।
फिलहाल पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी भी अटकल के बजाय वह विधेयक के आधिकारिक स्वरूप का इंतजार करेगी। इसके बाद ही समर्थन, विरोध या संशोधन की मांग जैसे विकल्पों पर निर्णय लिया जाएगा। अब सभी की नजर संसद में पेश होने वाले प्रस्ताव और उसके बाद DMK की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।