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जंतर-मंतर विवाद पर कांग्रेस का हमला, लेकिन सोनम वांगचुक का नाम लेने से किया परहेज

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज हो गई है। जहां कई विपक्षी नेताओं ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नाम लेकर कार्रवाई की आलोचना की, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला तो बोला, लेकिन अपने आधिकारिक बयानों में वांगचुक का उल्लेख […]

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  • July 18, 2026 4:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में बहस तेज हो गई है। जहां कई विपक्षी नेताओं ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का नाम लेकर कार्रवाई की आलोचना की, वहीं कांग्रेस ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला तो बोला, लेकिन अपने आधिकारिक बयानों में वांगचुक का उल्लेख नहीं किया। इसी बात को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि जंतर-मंतर पर जो हुआ, वह लोकतंत्र और संविधान पर “एक और काला धब्बा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है और जो भी अपनी बात उठाता है, उसे अलग नजरिए से देखा जाता है।

अपने संदेश में खरगे ने विभिन्न आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया, लेकिन सोनम वांगचुक का नाम नहीं लिया। इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी घटना की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस संवैधानिक अधिकार को सीमित करने की दिशा में काम कर रही है।

खेड़ा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति को कानून-व्यवस्था की समस्या मानना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है।इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने सीधे तौर पर सोनम वांगचुक का नाम लेते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनके बयानों में वांगचुक के साथ हुए व्यवहार को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा गया।

इसके विपरीत कांग्रेस ने अपने वक्तव्यों में घटना पर तो प्रतिक्रिया दी, लेकिन व्यक्तियों के बजाय व्यापक लोकतांत्रिक और संवैधानिक मुद्दों पर अधिक जोर दिया।कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि पार्टी ने जानबूझकर सोनम वांगचुक का नाम लेने से परहेज किया। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

जंतर-मंतर की घटना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में संसद और अन्य राजनीतिक मंचों पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन सकता है। फिलहाल कांग्रेस का फोकस लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों पर केंद्रित दिखाई दे रहा है, जबकि अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को सीधे सोनम वांगचुक के समर्थन से जोड़ रहे हैं।

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