भारत की युवा स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने जूनियर स्क्वैश विश्व चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने फाइनल मुकाबले में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त रुकय्या सालेम को सीधे तीन सेटों में हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत के साथ अनाहत न केवल जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं, बल्कि उन्होंने भारतीय स्क्वैश के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया।
पूरे देश की निगाहें जहां कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं, वहीं अनाहत सिंह की इस उपलब्धि ने भारतीय खेल जगत को एक और बड़ी खुशखबरी दी है। फाइनल मुकाबले में उन्होंने शुरुआत से ही आत्मविश्वास से भरा खेल दिखाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। आक्रामक शॉट्स, बेहतरीन फिटनेस और कोर्ट पर शानदार रणनीति के दम पर उन्होंने लगातार तीन सेट अपने नाम करते हुए खिताब पर कब्जा जमाया।
अनाहत पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार लय में नजर आईं। उन्होंने शुरुआती दौर से लेकर फाइनल तक लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया और कई मजबूत खिलाड़ियों को मात देकर खिताबी मुकाबले तक का सफर तय किया। फाइनल में भी उन्होंने दबाव को खुद पर हावी नहीं होने दिया और हर अंक के लिए पूरी एकाग्रता के साथ खेलते हुए जीत दर्ज की।
इससे पहले 21 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय खिलाड़ी जूनियर स्क्वैश विश्व चैंपियनशिप के फाइनल तक पहुंचने में सफल हुआ था। अनाहत ने फाइनल में पहुंचकर ही इतिहास रच दिया था, लेकिन उन्होंने यहीं रुकने के बजाय खिताब जीतकर भारतीय स्क्वैश को उसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक दिला दी। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
अनाहत सिंह पिछले कुछ वर्षों से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। कम उम्र में ही उन्होंने कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी मेहनत, अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन का ही परिणाम है कि आज वह विश्व जूनियर स्क्वैश की नई चैंपियन बनकर उभरी हैं।
यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इससे देश में इस खेल के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ेगी और नई प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर मिलेगा। अनाहत की उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व स्तर पर किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
अनाहत सिंह की इस ऐतिहासिक जीत पर खेल प्रेमियों, पूर्व खिलाड़ियों और खेल जगत से जुड़े कई लोगों ने उन्हें बधाई दी है। उनकी इस सफलता ने पूरे देश को गर्व महसूस कराया है और यह उम्मीद भी जगा दी है कि आने वाले वर्षों में भारतीय स्क्वैश विश्व मंच पर और अधिक मजबूती के साथ अपनी पहचान बनाएगा।