इंदौर: भगवान शिव और ब्रह्माजी को लेकर मौलाना जर्जिस अंसारी के कथित बयान के बाद मध्य प्रदेश के इंदौर में विवाद गहरा गया है। शनिवार को कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और कांवड़िए चंदन नगर थाने पहुंचे और मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, जिसके चलते पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर सामने आए कथित वीडियो में धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। उनका कहना है कि ऐसे बयानों से लोगों की भावनाएं आहत होती हैं और इस तरह के मामलों में कानून के अनुसार सख्त कदम उठाए जाने चाहिए।
स्थिति को देखते हुए चंदन नगर थाने के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए और भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। थाने के मुख्य प्रवेश द्वार को भी कुछ समय के लिए बंद रखा गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
विवाद की शुरुआत मौलाना जर्जिस अंसारी के एक कथित वीडियो के सामने आने के बाद हुई। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई धार्मिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। इससे पहले भी भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए उनके कथित बयान पर विवाद सामने आ चुका है। अब भगवान शिव और ब्रह्माजी से जुड़े कथित वक्तव्य को लेकर विरोध बढ़ गया है।
प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि धार्मिक विषयों पर सार्वजनिक मंचों से की जाने वाली टिप्पणियों में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। उनका आरोप है कि कथित बयान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले हैं, इसलिए प्रशासन को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
मामले को लेकर भोपाल समेत मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने बयान की निंदा करते हुए प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि समाज में शांति और आपसी सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में जिम्मेदारी से कदम उठाना जरूरी है।वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी।
पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कानून के तहत आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। फिलहाल मामला धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक अभिव्यक्ति से जुड़ी बहस का केंद्र बना हुआ है। प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि शिकायतकर्ताओं ने कानूनी कार्रवाई की मांग दोहराई है।