भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से बताया गया है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में अध्यादेश या आदेश जारी किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को असली डेयरी उत्पाद के नाम पर घटिया या मिलावटी विकल्प बेचे जाने से बचाना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब त्योहारों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। रक्षाबंधन जैसे अवसरों पर पनीर, दूध, मावा और अन्य डेयरी उत्पादों की खपत सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच और सैंपलिंग की गतिविधियां भी तेज किए जाने की बात कही गई है।
चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मंगलवार, 11 अगस्त को इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान एनालॉग पनीर को लेकर सरकार के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में असली पनीर के नाम पर एनालॉग पनीर की बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग को ऐसे उत्पादों की जांच और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
एनालॉग पनीर और पारंपरिक पनीर के निर्माण में मूल अंतर उनके कच्चे माल का होता है। सामान्य पनीर मुख्य रूप से दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में दूध के स्थान पर या उसके साथ अलग-अलग गैर-डेयरी वसा, वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल कुछ खाद्य उत्पादों में लागत कम करने के लिए किया जाता है।
हालांकि, किसी उत्पाद को केवल ‘एनालॉग’ कहे जाने से वह स्वतः स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित नहीं होता। उसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, उत्पादन प्रक्रिया और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन महत्वपूर्ण होता है। इसलिए सरकार की प्रस्तावित कार्रवाई का मुख्य फोकस उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर या असली पनीर के नाम पर ऐसा उत्पाद बेचने से रोकना माना जा रहा है।
राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के जरिए बाजार में बिकने वाले डेयरी उत्पादों के नमूने लेने और उनकी जांच कराने की प्रक्रिया को मजबूत करने की तैयारी में है। यदि किसी उत्पाद में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
स्वास्थ्य को लेकर भी इस विषय पर चर्चा होती रही है। अत्यधिक संतृप्त वसा, खराब गुणवत्ता वाले तेल या असंतुलित सामग्री का लंबे समय तक अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मोटापा, रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ना और हृदय संबंधी जोखिम जैसी समस्याओं का संबंध व्यक्ति के समग्र खान-पान से होता है। इसलिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सही लेबलिंग उपभोक्ता स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि प्रतिबंध या नियमन केवल कागजों तक सीमित न रहे। इसके लिए बाजारों, डेयरी इकाइयों, होटल-रेस्तरां और खाद्य प्रतिष्ठानों में नियमित जांच जरूरी होगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी पनीर खरीदते समय पैकेजिंग, लेबल, निर्माणकर्ता और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी की जांच करने के लिए जागरूक करना होगा।
सरकार की ओर से अंतिम आदेश या अध्यादेश जारी होने के बाद एनालॉग पनीर की बिक्री, उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े नियमों की स्थिति और स्पष्ट होगी। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग को इन नियमों के पालन की जिम्मेदारी निभानी होगी। मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सरकार का अंतिम आदेश कब जारी होता है और उसके बाद बाजार में इसकी निगरानी किस तरह की जाती है।