भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

अंतरिम व्यवस्था के तहत आज भी होगी नमाज धार (मध्य प्रदेश)। धार स्थित भोजशाला विवाद में गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद पक्ष की अंतरिम याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में अदालत द्वारा पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार को भी दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला […]

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  • August 7, 2026 6:07 am IST, Published 2 hours ago

अंतरिम व्यवस्था के तहत आज भी होगी नमाज

धार (मध्य प्रदेश)। धार स्थित भोजशाला विवाद में गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद पक्ष की अंतरिम याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। ऐसे में अदालत द्वारा पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था के अनुसार शुक्रवार को भी दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच भोजशाला परिसर के पीछे स्थित खसरा नंबर 612 की भूमि पर नमाज अदा की जाएगी। जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई की सुनवाई में मामले को संवेदनशील बताते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के 15 मई के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रखते हुए विवादित परिसर के निकट खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अंतरिम अनुमति दी थी।

अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी होगी और अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। गुरुवार को सुनवाई नहीं होने के कारण इस सप्ताह भी यही व्यवस्था लागू रहेगी।

हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना था वाग्देवी मंदिर

गौरतलब है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना था। इसके बाद मस्जिद पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां 14 जुलाई को वैकल्पिक नमाज स्थल की अंतरिम व्यवस्था दी गई थी।

साध्वी ऋतंभरा बोलीं— “भोजशाला की विजय सनातन संस्कृति की जीत”

इसी बीच गुरुवार को साध्वी ऋतंभरा भोजशाला पहुंचीं। उन्होंने मां वाग्देवी के दर्शन, पूजन और आरती की तथा सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भोजशाला का संघर्ष केवल एक धार्मिक स्थल का नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की विजय का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भोजशाला की जीत ने कृष्ण जन्मभूमि के संघर्ष को भी नई दिशा दी है। साध्वी ने विश्वास जताया कि भविष्य में मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से धार लाई जाएगी और भोजशाला विश्वभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी।

उन्होंने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कारों से जोड़ने का भी आह्वान किया।

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