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पुलिस हिरासत में मौत को लेकर गरमाया मामला, प्रशांत किशोर ने मांगा न्याय

मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में एक युवक की पुलिस हिरासत में मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर ने मामले को गंभीर बताते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और मृतक रोशन यादव के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग […]

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  • August 16, 2026 9:56 am IST, Published 27 minutes ago

मधुबनी: बिहार के मधुबनी जिले में एक युवक की पुलिस हिरासत में मौत को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जन सुराज के विधायक प्रशांत किशोर ने मामले को गंभीर बताते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और मृतक रोशन यादव के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि इस घटना के दो अलग-अलग पहलू हैं और दोनों की गंभीरता से जांच जरूरी है।

प्रशांत किशोर के अनुसार, रोशन यादव की मौत पुलिस हिरासत में हुई है। परिवार का आरोप है कि उसे 27 मई को रहिका थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया गया था, लेकिन गिरफ्तारी के संबंध में परिवार को कोई लिखित नोटिस या स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। परिवार ने यह भी दावा किया है कि रोशन कोई आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति नहीं था।

मृतक के परिवार की ओर से पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि रोशन को हिरासत में लेने के बाद उसके साथ मारपीट की गई और इसी वजह से उसकी मौत हुई। दूसरी ओर पुलिस, प्रशासन और जेल अधिकारियों की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि रोशन ने आत्महत्या की थी। ऐसे में मौत की वास्तविक वजह को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।

इसी विवाद को लेकर प्रशांत किशोर ने मधुबनी में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने विशेष रूप से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी के सामने परिवार की शिकायत और आरोपों को रखा। उनका कहना था कि घटना को केवल एक पक्ष के दावे के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सभी परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रशांत किशोर के मुताबिक, एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लिया है और हर स्तर पर तत्काल तथा विस्तृत जांच का आश्वासन दिया है। उन्होंने अधिकारियों को जांच के लिए दस दिन का समय देने की बात कही। उनका कहना था कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है तो घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकती हैं और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।

एसएसपी की ओर से जांच को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें भी सामने रखी गई हैं। बताया गया कि रोशन यादव की मौत की जांच जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम की निगरानी में की जाएगी। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाई जाएगी। जांच से जुड़ी रिपोर्ट भी एनएचआरसी को भेजे जाने की बात कही गई है।

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अगले दो से तीन दिनों में आने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट से मौत की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर परिवार की ओर से लगाए गए मारपीट के आरोप और पुलिस-प्रशासन की ओर से बताए जा रहे आत्महत्या के दावे के बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि मृतक के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और जांच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों के सामने परिवार की शिकायत को प्रमुखता से रखा और जांच के नतीजे सामने आने तक मामले पर नजर बनाए रखने की बात कही।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों को लेकर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही के सवाल लगातार उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच की निष्पक्षता, पोस्टमार्टम प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फिलहाल रोशन यादव की मौत को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। परिवार के आरोपों और पुलिस-प्रशासन के दावे में अंतर है। इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डीएम की निगरानी में होने वाली जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि रोशन यादव की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामले को लेकर प्रशांत किशोर ने दस दिनों के भीतर जांच में ठोस प्रगति की उम्मीद जताई है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम के निष्कर्ष और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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