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पीएम मोदी के बयान पर चिदंबरम का तंज, ‘दिमागी नक्सल’ कहलाने पर गर्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि उन्हें ‘दिमागी […]

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  • August 16, 2026 1:30 pm IST, Published 10 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहलाने पर गर्व है। चिदंबरम की यह टिप्पणी रविवार को सामने आई और इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।

पी. चिदंबरम ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। हालांकि उन्होंने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री के बयान का विस्तार से जिक्र नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट था कि उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से दिए गए भाषण के संदर्भ में थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने युवाओं से जुड़े मुद्दों और देश के विकास की चर्चा करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ देश ने बड़ी प्रगति की है, लेकिन विचारों के स्तर पर ऐसी प्रवृत्तियां अब भी चुनौती पेश कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, ऐसे तत्व हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाशने तथा युवाओं और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से मुख्यधारा से जुड़ने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों की पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेताओं ने तत्काल प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। पी. चिदंबरम से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकार और भाजपा की ओर से विरोधियों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का प्रयोग किया जा रहा है।

जयराम रमेश ने इसे सरकार की राजनीतिक निराशा से जोड़ते हुए कहा कि विरोधियों को अलग-अलग नाम देने के बजाय सरकार को वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन मुद्दों को तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ या ‘दिमागी नक्सल’ उठाते हैं, सरकार अंततः उन्हीं में से कुछ मांगों पर काम करती है। उनके बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गया।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि देश के युवा सरकार से सवाल करते हैं तो उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं की चिंताओं और उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि विपक्ष प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस का तर्क है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और नीतियों की आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है। वहीं प्रधानमंत्री के भाषण का व्यापक संदर्भ राष्ट्रीय विकास, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और हिंसा से दूर रखने का रहा।

इस पूरे विवाद में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक तरफ सरकार इसे उन विचारों के संदर्भ में इस्तेमाल कर रही है जिन्हें वह हिंसा, अराजकता या देश को गलत दिशा में ले जाने वाला मानती है। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सरकार द्वारा आलोचकों को निशाना बनाने वाली भाषा के तौर पर देख रही है।

पी. चिदंबरम की एक पंक्ति की प्रतिक्रिया ने इस राजनीतिक विवाद को और चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी बढ़ने की संभावना है। खासकर सोशल मीडिया पर दोनों दलों के नेता अपने-अपने तर्कों के साथ इस शब्द और प्रधानमंत्री के भाषण की व्याख्या कर सकते हैं।

फिलहाल विवाद का केंद्र प्रधानमंत्री मोदी का स्वतंत्रता दिवस भाषण और उसमें इस्तेमाल किया गया ‘दिमागी नक्सल’ शब्द है। चिदंबरम का जवाब, जयराम रमेश की प्रतिक्रिया और सुप्रिया श्रीनेत के बयान ने इस मुद्दे को विपक्ष बनाम सरकार की राजनीतिक बहस में बदल दिया है।

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