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नोएडा सेक्टर-12 में नल से निकला पीला पानी, लोगों में हड़कंप

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-12 में सोमवार सुबह घरों में सप्लाई किए गए पानी के रंग और गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता फैल गई। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई घरों में नलों से सामान्य पानी के बजाय पीले और बेहद गंदे रंग का पानी निकला। पानी को देखने के बाद लोगों ने […]

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  • August 17, 2026 11:59 pm IST, Published 34 minutes ago

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित सेक्टर-12 में सोमवार सुबह घरों में सप्लाई किए गए पानी के रंग और गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता फैल गई। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई घरों में नलों से सामान्य पानी के बजाय पीले और बेहद गंदे रंग का पानी निकला। पानी को देखने के बाद लोगों ने इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह जब उन्होंने घरों में पानी की सप्लाई शुरू की तो पानी का रंग देखकर वे हैरान रह गए। कुछ लोगों ने पानी को पीला और मटमैला बताया, जबकि सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में एक बड़े बर्तन में जमा पानी साफ तौर पर सामान्य पेयजल जैसा दिखाई नहीं दे रहा है। इस स्थिति को लेकर कई परिवारों ने पानी के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई।

पानी की गुणवत्ता पर उठे सवाल

सेक्टर-12 के प्लॉट ओनर्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (पोरवा) की ओर से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि घरों तक पहुंचने वाला पानी यदि इस तरह की स्थिति में है तो इसकी गुणवत्ता की जांच जरूरी है।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पानी का रंग पीला होने के साथ उसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। लोगों को आशंका है कि कहीं पाइपलाइन या जलापूर्ति व्यवस्था में किसी तरह की समस्या के कारण पानी प्रभावित तो नहीं हुआ। हालांकि, पानी के दूषित होने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

पाइपलाइन से जुड़ी समस्या की आशंका

लोगों का कहना है कि यदि पाइपलाइन के जरिए ऐसा पानी घरों तक पहुंच रहा है तो यह केवल एक घर या एक परिवार की समस्या नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने की आशंका हो सकती है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर पानी की सप्लाई व्यवस्था की जांच कराने की मांग तेज हो गई है।

पोरवा से जुड़े लोगों ने प्राधिकरण से पानी के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी में किसी तरह की अशुद्धि है या रंग बदलने की वजह जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या है।

लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीरें

पानी की तस्वीर सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। तस्वीर में एक बड़े बर्तन में पीले रंग का पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है। उसके पास एक छोटा बर्तन भी रखा है। तस्वीर को देखकर लोग पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल पूछ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर स्थानीय मुद्दों से जुड़े ऐसे मामले तेजी से लोगों तक पहुंचते हैं। यही वजह है कि पानी की तस्वीर सामने आने के बाद संबंधित विभाग से जांच कराने की मांग भी तेज हुई। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर के आधार पर पानी के दूषित होने की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

जल विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय एसोसिएशन की ओर से प्राधिकरण से केवल मौजूदा पानी की जांच ही नहीं, बल्कि जलापूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की मांग की गई है। एसोसिएशन ने पिछले छह महीने की नगर जलापूर्ति से संबंधित टीडीएस रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है।

इसके अलावा पाइपलाइन और जलापूर्ति व्यवस्था की जांच कराने की अपील की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी पाइपलाइन में तकनीकी खराबी, लीकेज या अन्य कारण से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तो उसे जल्द से जल्द ठीक किया जाना चाहिए।

लोगों की मांग है कि जांच के दौरान जलापूर्ति के स्रोत से लेकर घरों तक पहुंचने वाली पाइपलाइन तक पूरे नेटवर्क की जांच की जाए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि समस्या वास्तव में किस स्तर पर उत्पन्न हुई।

फोन पर भी अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर पोरवा की ओर से जल विभाग के अधिकारियों के समक्ष भी हस्तक्षेप की मांग की गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि जलापूर्ति जैसी बुनियादी सुविधा में गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

निवासियों की प्राथमिक चिंता यह है कि पानी का इस्तेमाल घरेलू जरूरतों में किया जाता है और यदि इसकी गुणवत्ता संदिग्ध है तो लोगों को परेशानी हो सकती है। खासतौर पर पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी को लेकर किसी भी तरह की आशंका को दूर करना जरूरी है।

जांच रिपोर्ट से साफ होगी असली वजह

फिलहाल पीले पानी के पीछे वास्तविक कारण क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। यह पाइपलाइन में जमी गंदगी, जलापूर्ति व्यवस्था में किसी तकनीकी समस्या या किसी अन्य वजह से हुआ है या नहीं, इसका पता पानी के नमूने की जांच और मौके पर तकनीकी निरीक्षण के बाद ही चल सकेगा।

स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि प्राधिकरण का जल विभाग शिकायत पर जल्द कार्रवाई करेगा और पानी के नमूनों की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करेगा। यदि जांच में पानी की गुणवत्ता में कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो संबंधित व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए भी कदम उठाने होंगे।

फिलहाल सेक्टर-12 में पीले पानी की तस्वीर ने जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इस शिकायत की जांच कब करता है और पानी के रंग व गुणवत्ता में बदलाव की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।

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