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स्थानीय चुनावों में युवाओं पर दांव, गहलोत बोले GenZ को दें ज्यादा टिकट

राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी की बैठक में युवाओं को चुनावी राजनीति में अधिक अवसर देने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवा या ‘जेन-जी’ […]

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  • August 19, 2026 5:45 pm IST, Published 40 minutes ago

राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी की बैठक में युवाओं को चुनावी राजनीति में अधिक अवसर देने की पैरवी की। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को 50 प्रतिशत से अधिक टिकट युवा या ‘जेन-जी’ उम्मीदवारों को दिए जाने चाहिए। उनका मानना है कि नई पीढ़ी तेजी से आगे बढ़ रही है और पार्टी को इस बदलाव के साथ कदम मिलाकर चलना चाहिए।

गहलोत ने कहा कि उम्मीदवारों का चयन किसी नेता की सिफारिश या व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके बजाय प्रत्याशियों की योग्यता, संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और स्थानीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के सच्चे और मेहनती कार्यकर्ताओं को ही टिकट मिलना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पार्टी के पुराने नेताओं ने लंबे समय तक संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई है और उनके अनुभव का फायदा नई पीढ़ी को मिलना चाहिए। हालांकि, बदलते राजनीतिक माहौल में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। गहलोत ने कहा कि युवाओं को अवसर मिलने के बाद उन्हें पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी साबित करनी होगी।

उन्होंने हाल के युवा आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में पीढ़ीगत बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। गहलोत के मुताबिक नई पीढ़ी राजनीति और सामाजिक मुद्दों को लेकर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय नजर आ रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए युवाओं को नेतृत्व और चुनावी मैदान में अवसर देना जरूरी हो गया है।

टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर गहलोत ने सुझाव दिया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षकों को स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षक जमीनी स्थिति, उम्मीदवार की छवि और संगठन में उसके योगदान को देखकर नाम तय करें। उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों को टिकट वितरण का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।

गहलोत ने यहां तक कहा कि उनकी अपनी सिफारिश को भी टिकट चयन में निर्णायक नहीं माना जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वरिष्ठ नेता हर स्थानीय क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित नहीं हो सकते। इसलिए स्थानीय कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों से मिलने वाली जानकारी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शहरी विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों और योजनाओं को कमजोर किया है। गहलोत ने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को भूखंडों के पट्टे दिए गए और शहरी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए योजना शुरू की गई थी, जिसे मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया।

गहलोत ने विकास परियोजनाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहरों के विस्तार और विकास प्राधिकरणों में शामिल हो रहे नए क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है। उनका दावा है कि इन मुद्दों को लेकर लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी है और इसका फायदा आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है।

बैठक में पार्टी नेताओं ने चुनावी तैयारियों, उम्मीदवारों के चयन और संगठन को सक्रिय करने पर चर्चा की। गहलोत ने विधायकों, सांसदों, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव लड़ने की अपील की। कांग्रेस का लक्ष्य स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करते हुए अधिक से अधिक सीटों पर जीत हासिल करना है।

 

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