नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सत्र का औपचारिक समापन यानी सत्रावसान नहीं हुआ है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। आमतौर पर इसके कुछ दिनों के भीतर सत्रावसान की अधिसूचना जारी कर दी जाती है।
सत्रावसान में हो रही देरी ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को तेज कर दिया है। चर्चा है कि सरकार किसी महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा है कि सरकार भविष्य के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा संसद में ला सकती है।
इससे पहले बजट सत्र के दौरान विपक्ष की आपत्तियों और सदन में पर्याप्त संख्या बल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण इस दिशा में आगे बढ़ने की संभावना नहीं बन पाई थी।
अब क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान बढ़ोतरी जैसे विकल्पों पर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है।
महिला आरक्षण के कार्यान्वयन का मुद्दा परिसीमन से भी जुड़ा हुआ है। जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने की स्थिति में दक्षिण भारत के कई राज्यों की लोकसभा सीटों में अपेक्षाकृत कमी आने की आशंका जताई जाती रही है।
दक्षिण भारत के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर चिंता जाहिर की है और राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े किसी भी संवैधानिक संशोधन पर राजनीतिक सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं होने पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने पूछा है कि आखिर सत्र स्थगित होने के इतने दिन बाद भी औपचारिक समापन क्यों नहीं किया गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अभी भी “दो-तिहाई बहुमत की तलाश” में हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि सत्रावसान में देरी के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति हो सकती है और सरकार किसी बड़े विधायी कदम की तैयारी कर सकती है।
सत्रावसान नहीं होने के कारण यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को आगे बढ़ाने के लिए संसद की कार्यवाही दोबारा बुलाने की तैयारी कर रही है।
हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से न तो किसी नए विधेयक को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई है और न ही किसी विशेष सत्र की घोषणा की गई है।
फिलहाल महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकसभा सीटों के पुनर्समायोजन से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सरकार के अगले कदम पर सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष और क्षेत्रीय दलों की भी नजर है।