अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में आग लगने की घटना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घटना के लिए यदि किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति राज्य सरकार ने संवेदना व्यक्त की है। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार की ओर से यह सहायता प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाने के उद्देश्य से दी जा रही है।
अमरावती के NICU में आग लगने की घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आग की जानकारी मिलते ही बचाव और राहत दल सक्रिय हुए। घटना की गंभीरता को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए तत्काल कदम उठाए गए। इस दौरान घायल बच्चों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने अमरावती जिला कलेक्टर को विशेष निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आग की घटना में घायल बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। इससे प्रभावित परिवारों को उपचार के आर्थिक बोझ से राहत मिलने की उम्मीद है।सरकार ने घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराने का फैसला किया है। उच्च-स्तरीय जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और अस्पताल में सुरक्षा के लिए उपलब्ध व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप थीं या नहीं। इसके अलावा घटना के दौरान अपनाई गई बचाव प्रक्रिया और अस्पताल प्रशासन की भूमिका की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की प्राथमिकता घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।
अस्पतालों में NICU जैसे संवेदनशील विभागों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। इन इकाइयों में नवजात और गंभीर स्थिति वाले बच्चों का उपचार किया जाता है, इसलिए आग या किसी अन्य आपात स्थिति में तत्काल बचाव की व्यवस्था आवश्यक होती है। घटना के बाद अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपायों की समीक्षा और आपातकालीन तैयारियों पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत सामने आई है।
अमरावती प्रशासन को घायल बच्चों के इलाज और उनके परिजनों की आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा स्थिति की निगरानी की जा रही है। सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और मुफ्त उपचार की घोषणा के बाद प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इस घटना ने अस्पतालों में फायर सेफ्टी और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। खासकर बच्चों के इलाज वाले विभागों में आग से बचाव के उपकरण, निकासी मार्ग, बिजली व्यवस्था और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता की नियमित जांच जरूरी मानी जाती है।
अब उच्च-स्तरीय जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट से आग लगने के वास्तविक कारण, सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति और संभावित जिम्मेदारी से जुड़े तथ्य सामने आने की उम्मीद है। इसके आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता और घायल बच्चों के सरकारी खर्च पर इलाज की घोषणा कर प्रभावित परिवारों को राहत देने की कोशिश की है। साथ ही, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देकर सरकार ने यह संकेत दिया है कि मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।