Toyota की iCARE पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता नया अवसर

बेंगलुरु: टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी 38वीं iCARE पहल पूरी की है। विश्व उद्यमी दिवस के अवसर पर आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण और उद्यमिता के जरिए अपनी आजीविका मजबूत करने में सहयोग […]

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  • August 24, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

बेंगलुरु: टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (TKM) ने ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में अपनी 38वीं iCARE पहल पूरी की है। विश्व उद्यमी दिवस के अवसर पर आयोजित इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण और उद्यमिता के जरिए अपनी आजीविका मजबूत करने में सहयोग देना था। कार्यक्रम में कंपनी के कर्मचारियों, उनके परिवारों और ग्रामीण महिला कारीगरों ने मिलकर काम किया।

कर्नाटक के केंगेरी के पास मंचागोंडनहल्ली स्थित बसवन्ना कन्वेंशन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में करीब 570 कर्मचारी स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इनके साथ ग्रामीण स्वयं सहायता समूह ‘कृषिकाला’ से जुड़ी 15 महिला कारीगर भी शामिल हुईं। कृषिकाला की महिलाएं लौकी और अन्य प्राकृतिक सामग्री से पर्यावरण के अनुकूल सजावटी उत्पाद तैयार करती हैं। इस काम के जरिए वे स्थानीय स्तर पर आय का साधन विकसित करने का प्रयास कर रही हैं।

कृषिकाला समूह के सामने हालांकि उत्पादन बढ़ाने और बाजार की मांग पूरी करने से जुड़ी कई चुनौतियां थीं। सीमित संसाधन, उपकरणों की कमी और कार्यशील पूंजी तक कम पहुंच के कारण समूह अपनी उत्पादन क्षमता को अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ा पा रहा था। आसपास के गांवों की कई अन्य महिलाएं भी इस उद्यम से जुड़ने में रुचि रखती थीं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण समूह का विस्तार सीमित था।

इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर ने स्वयं सहायता समूह को नक्काशी मशीनों और जरूरी शिल्प उपकरण उपलब्ध कराए। कंपनी की ओर से दी गई इस सहायता का उद्देश्य महिला कारीगरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उन्हें अपने काम को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में सक्षम बनाना है।

iCARE स्वयंसेवकों ने महिला कारीगरों के साथ मिलकर करीब 260 पर्यावरण-अनुकूल होम डेकोर उत्पाद तैयार किए। इन उत्पादों में सजावटी लैंप, पक्षियों के लिए घोंसले, पेन होल्डर और वॉल हैंगिंग जैसी वस्तुएं शामिल रहीं। स्वयंसेवकों ने उत्पादों को तैयार करने के साथ उनकी पॉलिशिंग और फिनिशिंग में भी सहयोग दिया। इस सामूहिक गतिविधि का उद्देश्य केवल एक दिन का उत्पादन करना नहीं, बल्कि महिला समूह को आगे अपने स्तर पर बेहतर गुणवत्ता और अधिक मात्रा में उत्पाद तैयार करने के लिए सक्षम बनाना रहा।

 

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कंपनी के मुताबिक, नए उपकरणों और प्रशिक्षण गतिविधियों से कृषिकाला अपने उत्पादों की विविधता बढ़ा सकता है। इससे उत्पादन क्षमता में सुधार के साथ आसपास के गांवों में कारोबार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। अधिक महिलाओं को समूह से जोड़कर स्थानीय स्तर पर महिला नेतृत्व वाले उद्यम को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और कॉर्पोरेट अफेयर्स के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि सामुदायिक विकास का उद्देश्य लोगों को अपने जीवन और भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को उत्पाद, उत्पादन के साधन और कारोबार बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है। कंपनी के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं को संसाधन और आत्मविश्वास उपलब्ध कराना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।

यह पहल टोयोटा किर्लोस्कर मोटर की कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी रणनीति से भी जुड़ी है। कंपनी ग्रामीण उद्यमिता, कौशल विकास और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने के प्रयासों को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है। कार्यक्रम को विकसित भारत 2047 और स्किल इंडिया जैसे व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जोड़ा गया है।

iCARE कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। यह टोयोटा किर्लोस्कर मोटर का कर्मचारी स्वयंसेवा कार्यक्रम है, जिसके तहत कंपनी के कर्मचारी और उनके परिवार सामुदायिक गतिविधियों में समय और कौशल का योगदान करते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, सड़क सुरक्षा और आपदा प्रबंधन इसके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं।

38वीं iCARE पहल के जरिए कंपनी ने ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के बजाय उनके उत्पादन साधनों और कारोबारी क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया है। प्राकृतिक संसाधनों से बने उत्पादों को बाजार से जोड़ने और अधिक महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में यह पहल स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।

 

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