कोलकाता: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। फेसबुक लाइव के जरिए उन्होंने महिला कल्याण योजनाओं, बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति, विश्वविद्यालय में हुई हिंसा और जनगणना जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने केंद्र और राज्य की राजनीति से जुड़े कई विषयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी जनता के अधिकारों और महिलाओं के हितों के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
ममता बनर्जी ने सबसे पहले महिलाओं से जुड़े कल्याणकारी मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में महिलाओं को सरकारी आर्थिक सहायता का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनके अनुसार, राज्य में करीब 2.42 करोड़ महिलाएं ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना से जुड़ी थीं, लेकिन इनमें से बड़ी संख्या में लाभार्थियों को आर्थिक सहायता नहीं मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बीजेपी की ओर से महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा भंडार’ जैसी योजनाओं का वादा किया गया था, लेकिन उस दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ।
ममता बनर्जी ने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों और आर्थिक सहायता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी महिलाओं का व्यवस्थित डेटा तैयार करने के लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी, जिन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। उनका कहना था कि इस तरह प्रभावित महिलाओं की पहचान कर उनके हित में आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने बीजेपी की हिंदुत्व की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच अंतर बताते हुए स्वामी विवेकानंद तथा रामकृष्ण परमहंस की विचारधारा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म को व्यापक आध्यात्मिक परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए और इसे केवल राजनीतिक विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों के बीच उनके इस बयान को बीजेपी के पारंपरिक हिंदू मतदाताओं तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ममता ने यह भी कहा कि बीजेपी को सत्ता से बाहर करने तक उनका राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि वह राजनीति से संन्यास लेने की योजना नहीं बना रही हैं। उनका दावा था कि पश्चिम बंगाल की जनता को बीजेपी की राजनीति और उसके कामकाज की वास्तविकता समझ में आने लगी है।
जादवपुर विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद पर भी ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में कथित तोड़फोड़ और हिंसा की निंदा करते हुए इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह की घटनाएं स्वीकार्य नहीं हैं। हालांकि, इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
जनगणना के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना की कवायद भविष्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC लागू करने का माध्यम बन सकती है। उनका कहना था कि ऐसी प्रक्रिया को लागू करने से पहले राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी। उन्होंने इसे लेकर पारदर्शिता और राजनीतिक परामर्श की मांग की।
ममता बनर्जी ने मतदाता सूची को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ऐसे मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल कराने के लिए उनकी पार्टी न्यायपालिका का रुख करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मतदाता अधिकारों से जुड़े मामलों को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाया जाएगा।
ममता बनर्जी के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हैं। महिला कल्याण योजनाओं से लेकर मतदाता सूची, जनगणना और हिंदुत्व की राजनीति तक कई मुद्दे राज्य में राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। उनके ताजा बयान से साफ है कि तृणमूल कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान को और धार देने की तैयारी में है।