नई दिल्ली। भारत के पूर्व टी-20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पहली बार कप्तानी से हटाए जाने और टीम से बाहर किए जाने पर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि कप्तानी जाने के बाद वह करीब डेढ़ महीने तक इस बारे में सोचते रहे कि आखिर ऐसा कैसे हो गया।
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान सूर्यकुमार ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि वह 2028 लॉस एंजिल्स ओलिंपिक और अगले टी-20 वर्ल्ड कप तक भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे।
सूर्यकुमार ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इस तरह कप्तानी से हटा दिया जाएगा। उनके मुताबिक, वह घर पर बैठकर काफी समय तक इस फैसले के बारे में सोचते रहे।
उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि वह लंबे समय तक टीम का नेतृत्व करेंगे, लेकिन चयनकर्ताओं ने अलग फैसला लिया। टी-20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने के बाद चयन समिति ने सूर्यकुमार को कप्तानी से हटाकर श्रेयस अय्यर को टीम का नया कप्तान बनाया।
इसके बाद सूर्यकुमार को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टीम में भी जगह नहीं मिली। चयनकर्ताओं ने उनके खराब फॉर्म को टीम से बाहर किए जाने की प्रमुख वजह बताया।
सूर्यकुमार ने कहा कि टीम में चयन नहीं होने के बाद उन्होंने भावनात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय खुद को चयनकर्ताओं की जगह रखकर स्थिति को समझने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि वह यह समझना चाहते थे कि चयनकर्ता उनसे आगे बढ़कर भविष्य के लिए नई टीम क्यों तैयार करना चाहते हैं। मैच के दौरान जब दबाव की स्थिति आती थी, तब उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की।
सूर्यकुमार ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका नाम टीम में नहीं है, तो उन्होंने मुस्कुराने की कोशिश की। उन्होंने मिले मौकों के लिए टीम और चयनकर्ताओं का आभार भी जताया।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम ने एक भी बाइलेटरल टी-20 सीरीज नहीं गंवाई। उनके नेतृत्व में टीम ने कई अहम मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया।
हालांकि, इसके बावजूद 2026 टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टीम में बदलाव किया गया और श्रेयस अय्यर को नया कप्तान बनाया गया।
सूर्यकुमार ने बताया कि टीम की घोषणा से करीब तीन दिन पहले चयन समिति ने उनसे फोन पर बात की थी। उन्हें बताया गया कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में उनका नाम नहीं होगा और अब आगे बढ़ने का समय है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले पर उन्होंने कोई विवाद खड़ा नहीं किया। सूर्यकुमार ने चयनकर्ताओं से कहा कि अगर उन्हें लगता है कि यह फैसला भारतीय टीम के भविष्य के लिए बेहतर है, तो वह इसे स्वीकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट खेलते रहेंगे और जब चयनकर्ताओं को लगेगा कि टीम को उनकी जरूरत है, तब वह वापसी के लिए तैयार रहेंगे।