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कांग्रेस नेताओं की हत्या मामले में NIA अदालत का फैसला, सभी दोषी

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में वर्ष 2013 के चर्चित झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए सभी 10 लोगों को दोषी करार दिया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास […]

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  • September 5, 2026 4:03 pm IST, Published 1 hour ago

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में वर्ष 2013 के चर्चित झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए सभी 10 लोगों को दोषी करार दिया है। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे गंभीर हिंसक घटनाओं में गिना जाता है, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की जान चली गई थी।

जगदलपुर स्थित एनआईए की विशेष अदालत में न्यायाधीश अभय सिंह राजपूत ने मामले की सुनवाई की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी के मुताबिक, अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया है। हालांकि, दोषियों को कितनी सजा दी जाएगी, इस पर अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। सजा की अवधि को लेकर फैसला 16 सितंबर को सुनाया जाएगा।

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष के अनुसार, कुल 101 गवाहों की गवाही हुई। दोषसिद्धि के बाद बचाव पक्ष ने साफ किया है कि वह इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देगा। अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें अभी फैसले की प्रति प्राप्त नहीं हुई है और दस्तावेज मिलने के बाद ही अपील के आधार तय किए जाएंगे।

झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस की ओर से विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली जा रही थी। यात्रा बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र स्थित झीरम घाटी से गुजर रही थी। इसी दौरान माओवादियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर घात लगाकर काफिले को निशाना बनाया। हमले में कांग्रेस के कई प्रमुख नेताओं, आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी। 30 से ज्यादा लोग घायल भी हुए थे।

इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की भी जान गई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व विपक्ष के नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार भी हमले में मारे गए थे। घटना के बाद पूरे देश में राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

हमले के बाद प्रारंभिक तौर पर राज्य पुलिस ने मामला दर्ज किया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने घटना के दो दिन बाद इसकी जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण को सौंप दी थी। इसके साथ ही घटना की परिस्थितियों और उससे जुड़े पहलुओं की जांच के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन भी किया गया था। करीब 13 साल पुराने इस मामले में अदालत की ओर से सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब निगाहें 16 सितंबर को होने वाली सजा पर टिकी हैं। इस फैसले को झीरम घाटी हमले के पीड़ित परिवारों और छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

वहीं, बचाव पक्ष द्वारा ऊपरी अदालत में अपील किए जाने की घोषणा से संकेत है कि मामले की कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। फैसले की विस्तृत प्रति सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि अदालत ने किन साक्ष्यों और आधारों पर आरोपियों को दोषी ठहराया है। फिलहाल अदालत ने दोषसिद्धि का आदेश सुना दिया है और सजा से संबंधित निर्णय के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है।

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