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दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 5 मौतों के बाद खुला PG का बड़ा राज

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला PG इमारत ढहने की घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 लोगों को मलबे से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया […]

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  • September 7, 2026 8:59 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला PG इमारत ढहने की घटना ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 लोगों को मलबे से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान के दौरान कई एजेंसियां लगातार काम करती रहीं।

हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। दिल्ली पुलिस ने कथित भवन मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार मामले में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है।

अचानक भरभराकर गिर गई पांच मंजिला इमारत

सत्य निकेतन में यह इमारत छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका सामने आई।

दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, NDRF, DDMA, MCD और सिविल डिफेंस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। भारी मलबे को सावधानी से हटाकर फंसे लोगों की तलाश की गई।

Blinkit की एंबुलेंस भी बनी चर्चा का हिस्सा

हादसे के दौरान स्थानीय लोगों ने Blinkit की एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार Blinkit की एंबुलेंस टीम को सूचना मिलने के बाद घटनास्थल की ओर भेजा गया और टीम ने बचाव अभियान में चिकित्सा सहायता दी। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि टीम करीब 10 मिनट में घटनास्थल पहुंची।

हादसे के दौरान स्थानीय लोगों ने Blinkit के माध्यम से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने में भी मदद ली। हालांकि, यह स्पष्ट है कि बड़े पैमाने पर बचाव अभियान की मुख्य जिम्मेदारी सरकारी आपदा एवं सुरक्षा एजेंसियों की थी।

अब जांच के घेरे में बेसमेंट का काम

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा और वहां चल रहे निर्माण कार्य को लेकर उठ रहा है। शुरुआती जांच में बेसमेंट में चल रहे काम, पानी जमा होने, नमी और कमजोर संरचना जैसी संभावित वजहों की जांच की जा रही है। अधिकारियों की नजर इस बात पर भी है कि निर्माण या मरम्मत के दौरान किसी महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्से को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

इंडियन एक्सप्रेस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इमारत में दरारें, मरम्मत कार्य और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इमारत में आपातकालीन निकास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

MCD की कार्रवाई, अवैध इमारतों पर गिरेगी गाज

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने भी सख्त रुख अपनाया है। रिपोर्टों के मुताबिक MCD ने चार मंजिल से अधिक की अवैध निर्माण वाली इमारतों को सील करने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद ऐसी इमारतों की पहचान करना है, जहां निर्माण नियमों का उल्लंघन करके लोगों को रहने के लिए जगह दी जा रही है।

एक अन्य ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ढही इमारत के पास स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और फायर NOC से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। हालांकि इन बिंदुओं पर जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

छात्रों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण छात्रों के लिए PG और किराये के कमरों का बड़ा केंद्र है। यहां कई पुरानी आवासीय इमारतों को समय के साथ PG या हॉस्टल में बदला गया है। ऐसे में रविवार की घटना ने सिर्फ एक इमारत की सुरक्षा पर नहीं, बल्कि पूरे इलाके में छात्र आवासों की structural safety और fire safety पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में पहले भी भवन गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस वजह से अब प्रशासन पर पुराने और बहुमंजिला PG भवनों की जांच करने का दबाव बढ़ गया है।

मालिक और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तैयारी

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने कथित मालिक के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इमारत में किस प्रकार का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था, उसके लिए अनुमति थी या नहीं, भवन की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी और PG के रूप में उसका संचालन निर्धारित सुरक्षा नियमों के अनुरूप हो रहा था या नहीं।

हादसे ने राजधानी के लिए छोड़ी बड़ी चेतावनी

सत्य निकेतन की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में पुराने भवनों और छात्र PG की सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी है। सिर्फ हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि ऐसे भवनों की पहले से पहचान की जाए जिनमें निर्माण, संरचना या अग्नि सुरक्षा से जुड़े खतरे मौजूद हैं।

फिलहाल पांच लोगों की मौत के बाद प्रशासन जांच और कार्रवाई में जुटा है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

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