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सत्य निकेतन हादसे पर सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट, सभी पीजी की सुरक्षा जांच जरूरी

  नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने के मामले ने राजधानी में छात्रों के लिए संचालित पीजी और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में एमिकस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर हादसे से जुड़ी जानकारी दी है। […]

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • September 8, 2026 11:45 am IST, Published 2 hours ago

 

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत गिरने के मामले ने राजधानी में छात्रों के लिए संचालित पीजी और निजी हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में एमिकस क्यूरी अजित सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर हादसे से जुड़ी जानकारी दी है। रिपोर्ट में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित पीजी, निजी हॉस्टल और छात्र आवासों की व्यापक सुरक्षा जांच और समयबद्ध ऑडिट कराने की जरूरत बताई गई है।

रिपोर्ट में सत्य निकेतन में अप्रैल 2022 में हुए एक पुराने हादसे का भी उल्लेख किया गया है। उस घटना में एक इमारत गिरने से दो लोगों की मौत और चार लोग घायल हुए थे। इसके बाद अब दोबारा इमारत ढहने की घटना ने भवनों की नियमित निगरानी, निर्माण नियमों के पालन और खतरनाक ढांचों की पहचान को लेकर व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन के पी-14 में एक बहुमंजिला इमारत ढह गई। लगभग 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी इस इमारत में बेसमेंट के साथ चार मंजिलें थीं। इसका इस्तेमाल छात्रों के लिए ‘Hostel Daze’ नाम से बॉयज पीजी के रूप में किया जा रहा था। हादसे में सात लोगों की मौत और कम से कम 12 लोगों को बचाए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।

हादसे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है। शुरुआती जानकारी में बेसमेंट में निर्माण से जुड़ा काम चलने और घटना से पहले वहां पानी जमा होने की बात सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में साउथ कैंपस थाने में संपत्ति के मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक संपत्ति के मालिक हरि ओम बंसल को 7 सितंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया।

घटना के बाद नगर निगम दिल्ली ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। हादसे के आसपास की इमारतों की स्थिति की भी जांच की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सत्य निकेतन से सटी पी-213 इमारत को भी असुरक्षित पाया गया और उसके ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए गए हैं।

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली के छात्र बहुल इलाकों में बड़ी संख्या में पीजी और निजी हॉस्टल संचालित होते हैं। कई मामलों में आवासीय संपत्तियों के इस्तेमाल में बदलाव, अतिरिक्त निर्माण या अन्य तरह के संशोधन के बाद ऐसी गतिविधियां चलाए जाने की आशंका रहती है। इसलिए निरीक्षण के दौरान केवल इमारत की बाहरी स्थिति ही नहीं, बल्कि स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर की भी जांच जरूरी है।

रिपोर्ट में भवन की मंजिलों की संख्या, बेसमेंट में किए गए बदलाव, जमीन के स्वीकृत उपयोग, संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के रास्तों की जांच पर विशेष जोर दिया गया है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित सभी पीजी और निजी हॉस्टलों के लिए समयसीमा तय कर सुरक्षा ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है।इस मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

7 सितंबर को हाईकोर्ट ने एमसीडी को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पीजी हॉस्टलों का एक सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह जानकारी भी मांगी है कि संबंधित इमारतें आवश्यक अनुमति के तहत बनी हैं या नहीं और कहीं भवन उपनियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया यह भी कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी केवल पीजी संचालक या संपत्ति मालिक तक सीमित नहीं मानी जा सकती। निर्माण और मरम्मत का काम निर्धारित भवन नियमों के अनुसार हो, यह सुनिश्चित करने में संबंधित प्राधिकरण और विश्वविद्यालय प्रशासन की भी भूमिका है।

अदालत ने अवैध निर्माण पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की जानकारी देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। सत्य निकेतन हादसे का मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुप्रीम कोर्ट दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रहा है। अब इस मामले में सुरक्षा मानकों की जांच, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्र आवासों की निगरानी पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

 

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