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गणेशोत्सव में शराबबंदी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 10 दिन घटे

पुणे। गणेशोत्सव शुरू होने से ठीक पहले पुणे में शराबबंदी को लेकर बड़ा प्रशासनिक और कानूनी बदलाव सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद पुणे जिला प्रशासन ने गणेशोत्सव के दौरान प्रस्तावित लंबी अवधि की शराबबंदी को घटाकर केवल दो प्रमुख मौकों तक सीमित कर दिया है। पहले गणेशोत्सव के दौरान कई […]

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  • September 14, 2026 8:10 am IST, Published 12 seconds ago

पुणे। गणेशोत्सव शुरू होने से ठीक पहले पुणे में शराबबंदी को लेकर बड़ा प्रशासनिक और कानूनी बदलाव सामने आया है। बॉम्बे हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद पुणे जिला प्रशासन ने गणेशोत्सव के दौरान प्रस्तावित लंबी अवधि की शराबबंदी को घटाकर केवल दो प्रमुख मौकों तक सीमित कर दिया है। पहले गणेशोत्सव के दौरान कई दिनों तक शराब की बिक्री और सेवन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि पूरे महाराष्ट्र में इस तरह का प्रतिबंध नहीं होने के बावजूद केवल पुणे जिले को क्यों चुना गया।

नए फैसले के मुताबिक अब 14 सितंबर को शाम 4 बजे तक और 25 सितंबर को पूरे दिन शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध रहेगा। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का अंतिम प्रमुख दिन है, जिस पर पहले से ही ड्राई डे की व्यवस्था रहती है। हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद प्रशासन ने संशोधित आदेश जारी करने की बात कही है।

हाईकोर्ट ने पूछा- सिर्फ पुणे को ही क्यों चुना?

मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा जब होटल कारोबारियों, वाइन शॉप संचालकों और संबंधित संगठनों ने लंबे समय तक शराबबंदी के आदेश को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि लाइसेंस प्राप्त कारोबारियों को इतने लंबे समय तक कारोबार से रोकना उचित नहीं है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमसी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने सुनवाई के दौरान प्रशासन से सवाल किया कि यदि गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना उद्देश्य है, तो केवल पुणे जिले में इतनी लंबी शराबबंदी क्यों लागू की जा रही है। अदालत ने यह भी कहा कि पूरे जिले को इस तरह से अलग करके देखना पुणे और उसके निवासियों की छवि पर सवाल खड़ा कर सकता है।

अदालत की आपत्ति का मुख्य आधार यह था कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा, ऐसा मान लेना उचित नहीं हो सकता। अदालत ने प्रशासन से प्रतिबंध के पीछे तर्क और उसके व्यापक प्रभाव को स्पष्ट करने को कहा।

10 दिन की जगह अब सिर्फ दो प्रमुख ड्राई डे

हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रतिबंध को काफी हद तक सीमित कर दिया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन शाम 4 बजे तक शराब की बिक्री और सेवन पर रोक रहेगी। इसके बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर पूरे दिन ड्राई डे रहेगा।

यानी जिस अवधि को लेकर पहले पुणे में लंबे समय तक शराबबंदी की चर्चा थी, उसमें बड़ा बदलाव हो गया है। प्रशासन ने अदालत को भरोसा दिलाया कि नया आदेश जारी कर संशोधित समय और तारीखों को स्पष्ट किया जाएगा।

गौरतलब है कि गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है, जबकि गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इसी वजह से दोनों तारीखों को संवेदनशील मानते हुए शराबबंदी को इन प्रमुख अवसरों तक सीमित किया गया है।

प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को बताया था वजह

लंबी शराबबंदी के पीछे प्रशासन की दलील गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकने से जुड़ी थी। पुणे में गणेशोत्सव बड़े स्तर पर मनाया जाता है और सार्वजनिक मंडलों, जुलूसों तथा विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरते हैं।

ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। इसी पृष्ठभूमि में शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन जरूरी कदम उठा सकता है, लेकिन इसके लिए लाइसेंसधारी कारोबारियों पर इतने लंबे समय तक पूर्ण प्रतिबंध लगाने का औचित्य भी स्पष्ट होना चाहिए।

कारोबारियों को मिली बड़ी राहत

लंबी शराबबंदी से सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, बार और शराब की लाइसेंस प्राप्त दुकानों पर पड़ने की संभावना थी। कई कारोबारियों का कहना था कि गणेशोत्सव जैसे बड़े आयोजन के दौरान लंबे समय तक बिक्री बंद रहने से उनके कारोबार और राजस्व पर असर पड़ सकता है।

हाईकोर्ट में होटल और वाइन शॉप मालिकों से जुड़े संगठनों की याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यही मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक पूर्ण प्रतिबंध लगाने से राज्य को मिलने वाले आबकारी राजस्व पर असर पड़ सकता है।

इस बदलाव के बाद कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि निर्धारित ड्राई डे पर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लागू रहेगा और संबंधित प्रतिष्ठानों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा।

पुणे के लिए हाईकोर्ट की टिप्पणी क्यों बनी चर्चा का विषय?

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा हाईकोर्ट की उस टिप्पणी की रही जिसमें अदालत ने पूछा कि शराबबंदी के लिए केवल पुणे को ही क्यों चुना गया। अदालत ने संकेत दिया कि किसी एक जिले के लोगों को शराब सेवन के आधार पर सामान्यीकृत तरीके से देखना उचित नहीं है।

अदालत की सख्ती के बाद प्रशासन ने अपना रुख बदला और लंबी अवधि के प्रतिबंध को वापस लेकर इसे दो प्रमुख तारीखों तक सीमित कर दिया। इससे यह मामला प्रशासनिक आदेश और न्यायिक समीक्षा के बीच संतुलन का उदाहरण भी बन गया है।

आज से शुरू हो रहा गणेशोत्सव, सुरक्षा पर भी जोर

14 सितंबर से गणेशोत्सव शुरू होने के साथ पुणे में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी कई तैयारियां की गई हैं। शहर और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन की व्यवस्था की है।

ऐसे में शराबबंदी का संशोधित आदेश भी प्रशासन की सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रहेगा। आम लोगों से अपील की गई है कि वे गणेशोत्सव के दौरान प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

निष्कर्ष: पुणे में गणेशोत्सव के दौरान प्रस्तावित लंबी शराबबंदी अब खत्म हो गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद इसे केवल 14 सितंबर शाम 4 बजे तक और 25 सितंबर पूरे दिन लागू रखने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से जहां शराब कारोबार से जुड़े लोगों को राहत मिली है, वहीं गणेशोत्सव के प्रमुख दिनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन पर बनी रहेगी।

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