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2029 तक UCC लागू करने के लक्ष्य पर JDU ने जताई आपत्ति

नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र की रणनीति और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहयोगी दलों की अलग-अलग राय के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 तक NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के लक्ष्य का […]

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  • September 14, 2026 5:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर केंद्र की रणनीति और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहयोगी दलों की अलग-अलग राय के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से 2029 तक NDA शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के लक्ष्य का ऐलान किए जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस मुद्दे पर उनसे बातचीत करने का फैसला किया है। पार्टी लंबे समय से UCC को लेकर जल्दबाजी के खिलाफ रही है और व्यापक सहमति बनाने की मांग करती रही है।

शाह के बयान के बाद बिहार में JDU की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने दी जाएगी। वहीं, JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने संकेत दिया कि पार्टी का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के लिए गृह मंत्री से समय मांगा जा रहा है। बैठक में पार्टी समान नागरिक संहिता को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखेगी।

JDU का मूल रुख यह रहा है कि देश में समान नागरिक संहिता जैसे व्यापक प्रभाव वाले कानून को जल्दबाजी में लागू नहीं किया जाना चाहिए। पार्टी की ओर से विधि आयोग को दिए गए अपने पक्ष में भी व्यापक चर्चा और सभी हितधारकों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। JDU का कहना है कि विभिन्न धर्मों, विशेषकर धार्मिक अल्पसंख्यकों, राज्य सरकारों और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श के बाद ही इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। पार्टी के मुताबिक ऐसा करने से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

NDA के एक अन्य प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) का रुख भी इस मामले में सावधानी भरा रहा है। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ TDP पहले भी कह चुकी है कि समान नागरिक संहिता के किसी भी प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा जरूरी है। पार्टी कानून के मसौदे पर व्यापक बहस के बाद ही अपना अंतिम रुख तय करने के पक्ष में रही है। ऐसे में शाह के बयान के बाद NDA के भीतर UCC को लेकर सहयोगी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

हालांकि, बीजेपी के भीतर इस बात को लेकर कोई खास आश्चर्य नहीं माना जा रहा कि JDU और TDP ने अलग रुख अपनाया है। दोनों सहयोगी दल पहले भी कई मुद्दों पर बीजेपी से अलग राय रखते रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के दौर में भी गठबंधन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम का सहारा लिया गया था। उस समय राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता जैसे संवेदनशील मुद्दों को साझा एजेंडे से अलग रखा गया था।

वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां हालांकि पहले से अलग हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में बीजेपी को सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों के समर्थन की आवश्यकता पड़ी और TDP तथा JDU की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इसके बावजूद हाल के राजनीतिक बदलावों ने NDA के भीतर शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। बिहार में सत्ता समीकरण बदलने और बीजेपी की स्थिति मजबूत होने के बाद गठबंधन की राजनीति में नए समीकरण दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कुछ विपक्षी सांसदों के NDA के साथ आने से भी केंद्र की राजनीतिक स्थिति मजबूत हुई है।

फिर भी बीजेपी के लिए UCC को लेकर सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना अहम माना जा रहा है। पार्टी की ओर से सहयोगियों के सामने उत्तराखंड का उदाहरण रखा जा सकता है, जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। बीजेपी का तर्क रहा है कि वहां कानून तैयार करने से पहले व्यापक प्रक्रिया अपनाई गई और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई प्रावधानों को मजबूत किया गया।

राजनीतिक तौर पर देखें तो JDU और TDP ने पहले भी केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसलों में अलग-अलग स्तर पर समर्थन दिया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने, नागरिकता संशोधन कानून और वक्फ से जुड़े संशोधन जैसे मुद्दों पर दोनों दलों का रुख अलग-अलग परिस्थितियों में सरकार के पक्ष में रहा है। हालांकि कई मौकों पर दोनों ने बहस, प्रक्रिया और संसदीय जांच की जरूरत भी उठाई है।

ऐसे में समान नागरिक संहिता NDA के लिए केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति का भी विषय बन गया है। आने वाले दिनों में अमित शाह और JDU नेताओं की संभावित मुलाकात इस बात के लिहाज से अहम होगी कि केंद्र सरकार अपने UCC एजेंडे को आगे बढ़ाते समय सहयोगी दलों की आपत्तियों और सुझावों को किस तरह समायोजित करती है।

 

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