नई दिल्ली: सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच रील, वीडियो, स्टोरी और निजी विचार साझा करने के बढ़ते चलन के बीच केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्र सरकार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग ‘सोशल मीडिया आचार संहिता’ (Social Media Code of Conduct) लाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सोशल मीडिया पर सरकारी कर्मचारियों के व्यवहार, पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों से सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक स्पष्ट आचार संहिता बनाने की संभावना पर विचार करने को कहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कई सरकारी अधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने काम, उपलब्धियों, सरकारी गतिविधियों और व्यक्तिगत विचारों से जुड़े वीडियो और रील पोस्ट कर रहे हैं।
ड्यूटी के दौरान रील बनाने पर भी नजर
प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि कुछ सरकारी अधिकारी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते दिखाई देते हैं। अधिकारियों द्वारा रील देखने, वीडियो बनाने, अपनी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने या अपने काम का प्रचार करने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चिंता सामने आई है।
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि सरकारी सेवा से जुड़े कर्मचारियों के लिए यह स्पष्ट करना है कि उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किस तरह का व्यवहार करना चाहिए और किन विषयों पर सावधानी बरतनी चाहिए।
दरअसल, सोशल मीडिया आज सरकारी अधिकारियों के लिए भी नागरिकों तक सूचना पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। सरकारी योजनाओं, राहत कार्यों, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े संदेशों को सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से जनता तक पहुंचाया जा सकता है। लेकिन व्यक्तिगत प्रचार और आधिकारिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के सामने एक नई चुनौती बन गया है।
क्यों महसूस हुई नए नियम की जरूरत?
सरकारी कर्मचारियों के लिए पहले से ही आचरण संबंधी नियम मौजूद हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश नियम उस दौर में बनाए गए थे, जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अस्तित्व में नहीं थे। इसलिए रील, इंस्टाग्राम स्टोरी, यूट्यूब वीडियो, एक्स पोस्ट और अन्य डिजिटल गतिविधियों को लेकर स्पष्ट और अलग नियम नहीं हैं।
इसी वजह से अधिकारियों और सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक वर्ग का मानना है कि मौजूदा डिजिटल दौर में सोशल मीडिया के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जरूरी हैं। प्रस्तावित कोड में यह तय किया जा सकता है कि सरकारी अधिकारी अपनी आधिकारिक स्थिति का इस्तेमाल सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत प्रचार के लिए किस सीमा तक कर सकते हैं।
सरकार की चिंता केवल रील या मनोरंजन संबंधी वीडियो तक सीमित नहीं है। संवेदनशील सरकारी जानकारी, व्यक्तिगत राय, विवादित विषयों पर टिप्पणी और ऐसे कंटेंट को लेकर भी नियम बनाए जाने की संभावना है, जो सरकारी कर्मचारी की आधिकारिक जिम्मेदारियों या निष्पक्षता की छवि को प्रभावित कर सकता है।
सभी रैंक के अधिकारियों पर लागू हो सकता है कोड
रिपोर्टों में सामने आया है कि प्रस्तावित सोशल मीडिया आचार संहिता तैयार होने के बाद इसे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है। इसमें अलग-अलग रैंक के कर्मचारियों के लिए डिजिटल व्यवहार से संबंधित दिशा-निर्देश तय किए जाने की संभावना है।
हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस प्रस्तावित कोड की अंतिम अधिसूचना, लागू होने की निश्चित तारीख या विस्तृत नियम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोशल मीडिया पर किस तरह की पोस्ट पर प्रतिबंध लगाया जाएगा या उल्लंघन की स्थिति में किस प्रकार की कार्रवाई होगी।
अधिकारियों के लिए क्या बदल सकता है?
अगर सोशल मीडिया कोड लागू होता है तो सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले कुछ अतिरिक्त सावधानियां बरतनी पड़ सकती हैं। आधिकारिक कार्य से जुड़ी जानकारी साझा करने, सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रचार के लिए करने, संवेदनशील जानकारी पोस्ट करने या पद की प्रतिष्ठा से जुड़े विषयों पर निजी टिप्पणी करने को लेकर स्पष्ट नियम सामने आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की आचार संहिता का उद्देश्य सोशल मीडिया को बंद करना नहीं बल्कि ‘जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार’ सुनिश्चित करना होना चाहिए। सरकारी अधिकारी भी आम नागरिकों की तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनके पद और जिम्मेदारियां उन्हें सामान्य सोशल मीडिया उपयोगकर्ता से अलग बनाती हैं।
ऐसे में व्यक्तिगत अभिव्यक्ति और सरकारी सेवा की मर्यादा के बीच संतुलन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
‘एक भारत’ पोर्टल पर भी जोर
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक से जुड़ी रिपोर्टों में सोशल मीडिया कोड के साथ डिजिटल सेवाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा का उल्लेख है। प्रधानमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से नागरिकों के लिए प्रस्तावित ‘एक भारत’ पोर्टल को जल्द शुरू करने की दिशा में काम तेज करने को कहा है।
इस प्रस्तावित प्लेटफॉर्म का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए एकीकृत डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध कराना बताया गया है। वर्तमान में नागरिकों को अलग-अलग सरकारी वेबसाइटों और सेवाओं के लिए अलग-अलग पोर्टल तथा लॉगिन व्यवस्था का सामना करना पड़ता है। एकीकृत प्लेटफॉर्म से इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बढ़ती बहस
सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर बहस केवल भारत तक सीमित नहीं है। डिजिटल दौर में दुनिया भर की सरकारी संस्थाओं के सामने यह सवाल है कि अधिकारी सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस सीमा तक व्यक्तिगत रूप से कर सकते हैं और किस बिंदु पर उनका निजी सोशल मीडिया व्यवहार उनकी आधिकारिक भूमिका से जुड़ जाता है।
भारत में भी अधिकारियों की सोशल मीडिया मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। कई अधिकारी जनसंपर्क और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। दूसरी ओर, व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ाने वाली सामग्री और सरकारी पद के प्रचार के बीच अंतर को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
ऐसे में प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल व्यवहार के लिए एक नया ढांचा तैयार कर सकता है। हालांकि, अंतिम नियम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरकार किन गतिविधियों को स्वीकार्य मानती है और किन पर प्रतिबंध या अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि सोशल मीडिया कोड अभी प्रस्तावित स्तर पर है। इसकी अंतिम रूपरेखा और लागू होने की तारीख का इंतजार है।