यूपी में 60 सेकंड की रील से युवा बताएंगे अपने शहर की कहानी

उत्तर प्रदेश पर्यटन ने युवाओं के लिए ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान शुरू किया है।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 19, 2026 8:30 pm IST, Published 2 hours ago

लखनऊ। सोशल मीडिया के दौर में छोटी वीडियो सामग्री लोगों तक किसी स्थान की पहचान पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। इसी डिजिटल बदलाव को पर्यटन से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन ने युवाओं के लिए ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत युवा अपने शहर की संस्कृति, विरासत, खान-पान, परंपराओं और कम चर्चित पर्यटन स्थलों की कहानी अधिकतम 60 सेकंड की रील के माध्यम से सामने ला सकेंगे।

इस पहल की खास बात यह है कि शहर की कहानी किसी सरकारी या तय भाषा में बताने के बजाय युवा अपने अनुभव, अपनी आवाज और अपने अंदाज में प्रस्तुत कर सकेंगे। उद्देश्य यह है कि उत्तर प्रदेश की पहचान को केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय लोगों की नजर से भी दुनिया के सामने लाया जाए।

60 सेकंड में अपने शहर की पहचान बताने का मौका

‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान के अंतर्गत प्रतिभागियों को अपने शहर से जुड़ी किसी खास पहचान को अधिकतम 60 सेकंड की रील में प्रस्तुत करना होगा। इसमें शहर की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय खान-पान, परंपराएं, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक गतिविधियां या ऐसा पर्यटन स्थल शामिल किया जा सकता है, जो आम तौर पर बड़े पर्यटन प्रचार का हिस्सा नहीं बन पाता।

अभियान की अवधारणा इस सोच पर आधारित है कि स्थानीय निवासी अपने शहर को सबसे करीब से जानते हैं। किसी ऐतिहासिक स्थान की कहानी हो, किसी पारंपरिक व्यंजन से जुड़ी जानकारी हो या फिर किसी पुराने मोहल्ले और स्थानीय परंपरा की खासियत—इन सबको युवा अपनी रचनात्मक शैली में प्रस्तुत कर सकते हैं।

इससे शहरों की पहचान को एक अलग नजरिए से देखने का अवसर मिल सकता है। पर्यटकों के लिए भी ऐसी सामग्री यात्रा की योजना बनाने और किसी स्थान को स्थानीय नजरिए से समझने में उपयोगी हो सकती है।

कैमरे के सामने खुद नजर आना होगा जरूरी

अभियान में भाग लेने वाले युवाओं के लिए वीडियो बनाने से जुड़े कुछ जरूरी प्रावधान भी बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार रील में प्रतिभागी का स्वयं कैमरे के सामने आना जरूरी होगा। चेहरा स्पष्ट दिखाई देना चाहिए और आवाज भी साफ सुनाई देनी चाहिए। वीडियो की शूटिंग खुले स्थान पर करने की बात कही गई है, ताकि पृष्ठभूमि में संबंधित शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल या स्थानीय पहचान से जुड़ा स्थान दिखाई दे।

रील हिंदी या अंग्रेजी में बनाई जा सकती है। खास बात यह है कि युवाओं को अपनी कहानी किसी तय स्क्रिप्ट में बांधने के बजाय अपने शब्दों और अपनी शैली में प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। हर वीडियो के अंत में ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ कहना अनिवार्य बताया गया है।

जेन-जी को बनाया जा रहा सांस्कृतिक दूत

उत्तर प्रदेश पर्यटन की इस पहल में जेन-जी सहित अन्य युवाओं को अपने-अपने शहरों का सांस्कृतिक प्रतिनिधि बनाने पर जोर दिया गया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान केवल प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। अलग-अलग जिलों, शहरों और गांवों की अपनी स्थानीय परंपराएं, खान-पान, हस्तशिल्प और कहानियां हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर युवाओं की सक्रियता को देखते हुए इस तरह की पहल स्थानीय संस्कृति को नई पीढ़ी की भाषा और माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर देती है। सोशल मीडिया पर किसी स्थान से जुड़ा छोटा और प्रभावी वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकता है।

यही कारण है कि पर्यटन के प्रचार में अब केवल पारंपरिक विज्ञापन, ब्रोशर या वेबसाइट की जानकारी पर निर्भरता नहीं रह गई है। यात्रियों की पसंद में शॉर्ट वीडियो और स्थानीय अनुभवों की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में युवाओं की भागीदारी किसी शहर की डिजिटल पहचान को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती है।

लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक अवसर

उत्तर प्रदेश भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद विविध राज्य है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ब्रज, अवध, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों की अपनी अलग सांस्कृतिक विशेषताएं हैं। ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों के युवाओं के पास अपने स्थानीय अनुभवों को सामने रखने के लिए विषयों की कमी नहीं है।

उदाहरण के तौर पर लखनऊ की चिकनकारी, खान-पान और ऐतिहासिक इमारतों को रील का विषय बनाया जा सकता है। इसी तरह ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराएं, बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत, पूर्वांचल के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल तथा तराई क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताएं युवाओं की कहानियों का हिस्सा बन सकती हैं।

इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इससे उन स्थानों की ओर ध्यान आकर्षित हो सकता है, जिन्हें बड़े पर्यटन केंद्रों की तुलना में कम पहचान मिली है। स्थानीय युवा अपने अनुभव के आधार पर ऐसे स्थानों को सामने ला सकते हैं, जिनकी जानकारी आम पर्यटक को आसानी से नहीं मिलती।

सोशल मीडिया से पर्यटन को नई दिशा देने की कोशिश

पर्यटन क्षेत्र में सोशल मीडिया का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। किसी शहर की खूबसूरत तस्वीर, स्थानीय भोजन का वीडियो या किसी ऐतिहासिक स्थल की छोटी कहानी लोगों को उस स्थान के बारे में जानने के लिए प्रेरित कर सकती है।

‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान इसी डिजिटल व्यवहार को पर्यटन प्रचार से जोड़ने का प्रयास है। इसमें सरकारी प्रचार की बजाय स्थानीय युवाओं की आवाज के माध्यम से शहरों की कहानी बताने पर जोर है। इससे दर्शकों को किसी स्थान की जानकारी के साथ वहां के लोगों का अनुभव भी मिल सकता है।

अभियान के लिए प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां ऑनलाइन माध्यम से भेज सकते हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में बताया गया है कि इसके लिए संबंधित ऑनलाइन फॉर्म और उत्तर प्रदेश पर्यटन के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जानकारी ली जा सकती है।

छोटी रील में बड़ी कहानी कहने की चुनौती

60 सेकंड का समय छोटा जरूर है, लेकिन इसी सीमा में किसी शहर की पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना इस अभियान की रचनात्मक चुनौती भी है। युवा यदि वीडियो की शुरुआत किसी आकर्षक तथ्य या स्थानीय कहानी से करें और कम समय में स्पष्ट जानकारी दें, तो दर्शकों का ध्यान बनाए रखना आसान हो सकता है।

साफ आवाज, स्पष्ट दृश्य और वास्तविक स्थानीय परिवेश इस तरह के वीडियो को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी साझा करते समय तथ्यात्मक शुद्धता का ध्यान रखना भी जरूरी होगा।

कुल मिलाकर, ‘विजिट माय स्टेट उत्तर प्रदेश’ अभियान युवाओं को अपने शहर से जुड़ने और उसकी पहचान को डिजिटल माध्यम से साझा करने का अवसर देता है। 60 सेकंड की रील के जरिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों की स्थानीय कहानियां सामने आने से राज्य की विविध संस्कृति, विरासत और पर्यटन संभावनाओं को एक नए डिजिटल मंच पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

Advertisement