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SIM कार्ड को लेकर बड़ा अलर्ट: इस गलती पर 3 साल की जेल

मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, सरकारी सेवाओं और निजी बातचीत तक के लिए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है।

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  • September 22, 2026 10:16 pm IST, Published 10 seconds ago

नई दिल्ली । मोबाइल फोन आज हर व्यक्ति की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, सरकारी सेवाओं और निजी बातचीत तक के लिए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है। ऐसे में मोबाइल कनेक्शन और उससे जुड़े पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी बीच दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल यूजर्स को SIM कार्ड के गलत इस्तेमाल, फर्जी तरीके से SIM जारी कराने और टेलीकॉम पहचान से छेड़छाड़ को लेकर महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। विभाग के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में ऐसे उल्लंघनों पर तीन वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

अपने नाम का SIM किसी दूसरे को देना पड़ सकता है भारी

दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को सलाह दी है कि उनके नाम पर जारी SIM कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दिया जाए। खासकर यदि वह SIM किसी गैरकानूनी गतिविधि या साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है, तो मूल ग्राहक के लिए भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

DoT ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसके पहचान दस्तावेजों के आधार पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर सक्रिय है, जिसे उसने स्वयं नहीं लिया है, तो उसे तत्काल इसकी शिकायत करनी चाहिए।

फर्जी दस्तावेज से SIM लेने पर भी कार्रवाई

दूरसंचार विभाग की हालिया चेतावनी केवल SIM किसी दूसरे को देने तक सीमित नहीं है। धोखाधड़ी, जालसाजी या किसी दूसरे व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके SIM या टेलीकॉम पहचान हासिल करना भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है।

Telecommunications Act, 2023 की धारा 42 के तहत धोखाधड़ी, cheating या impersonation के माध्यम से Subscriber Identity Module (SIM) या अन्य टेलीकॉम पहचान हासिल करने को अपराध माना गया है। इसी प्रावधान के तहत टेलीकॉम पहचान में छेड़छाड़ से संबंधित गतिविधियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।

25 SIM कनेक्शन का मामला सामने आने के बाद चेतावनी

दूरसंचार विभाग की ताजा एडवाइजरी के पीछे हाल में सामने आया एक मामला भी महत्वपूर्ण है। विभाग के अनुसार, साइबर अपराध की जांच के दौरान छत्तीसगढ़ में एक Point of Sale (PoS) एजेंट द्वारा नागरिकों के पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 25 मोबाइल कनेक्शन कथित तौर पर सक्रिय किए जाने का मामला सामने आया।

DoT और संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं ने कार्रवाई करते हुए संबंधित PoS को ब्लैकलिस्ट किया। इन मोबाइल कनेक्शनों की डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के माध्यम से जांच की गई और संदिग्ध नंबरों का दोबारा सत्यापन कराया गया। जिन नंबरों का पुनः सत्यापन नहीं हो पाया, उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया।

IMEI नंबर से छेड़छाड़ भी अपराध

मोबाइल यूजर्स के लिए एक और महत्वपूर्ण बात IMEI नंबर से जुड़ी है। IMEI यानी International Mobile Equipment Identity मोबाइल डिवाइस की विशिष्ट पहचान से जुड़ा नंबर होता है। दूरसंचार विभाग ने इसके साथ छेड़छाड़ या अनधिकृत टेलीकॉम पहचान के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दी है।

सरकार के अनुसार, Telecommunications Act, 2023 की धारा 42(3)(c) टेलीकॉम पहचान में छेड़छाड़ पर रोक लगाती है। वहीं धारा 42(3)(e) धोखाधड़ी, cheating या impersonation के जरिए SIM या टेलीकॉम पहचान हासिल करने से संबंधित है। इन प्रावधानों के तहत उल्लंघन की स्थिति में तीन वर्ष तक की कैद, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

क्या हर SIM इस्तेमाल करने पर लगेगा 50 लाख का जुर्माना?

यहां एक जरूरी बात समझना भी आवश्यक है। सिर्फ सामान्य रूप से अपना वैध SIM कार्ड इस्तेमाल करने पर 50 लाख रुपये का जुर्माना या तीन साल की जेल का प्रावधान नहीं है। विभाग की चेतावनी विशेष प्रकार के गैरकानूनी कृत्यों से संबंधित है, जैसे फर्जी तरीके से SIM हासिल करना, टेलीकॉम पहचान से छेड़छाड़ करना या कानून में बताए गए अन्य संबंधित अपराध।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी पोस्ट को बिना पूरी जानकारी के समझना उचित नहीं है, जिनमें यह दावा किया जा रहा हो कि किसी भी SIM यूजर पर सीधे 50 लाख रुपये का जुर्माना लग जाएगा। कानून में दंड संबंधित अपराध और परिस्थितियों के आधार पर लागू होता है।

अपने नाम पर कितने मोबाइल नंबर हैं, ऐसे करें जांच

दूरसंचार विभाग ने नागरिकों को अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच के लिए Sanchar Saathi पोर्टल और मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इससे मोबाइल ग्राहक यह पता कर सकते हैं कि उनके नाम से कौन-कौन से मोबाइल कनेक्शन जुड़े हुए हैं।

अगर सूची में कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जिसे ग्राहक पहचानता नहीं है, तो उसे संबंधित प्रक्रिया के माध्यम से रिपोर्ट किया जा सकता है। इससे पहचान दस्तावेजों के संभावित दुरुपयोग का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

मोबाइल यूजर्स इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञ सावधानी के तौर पर सलाह देते हैं कि मोबाइल ग्राहक अपना आधार या अन्य पहचान दस्तावेज अनजान लोगों के साथ साझा करने से बचें और SIM लेते समय KYC प्रक्रिया को स्वयं समझकर पूरा करें। अपने नाम पर जारी SIM को किसी अन्य व्यक्ति को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के लिए देना भी जोखिम पैदा कर सकता है।

यदि पुराना मोबाइल नंबर इस्तेमाल में नहीं है, तो उसे बंद कराने की प्रक्रिया पूरी करना बेहतर है। इसी तरह नया फोन खरीदते समय डिवाइस और IMEI से संबंधित जानकारी की भी जांच की जा सकती है।

दूरसंचार विभाग की हालिया चेतावनी का मुख्य उद्देश्य मोबाइल कनेक्शन के जरिए होने वाली धोखाधड़ी और साइबर अपराधों को रोकना तथा ग्राहकों को उनके नाम पर जारी कनेक्शनों के प्रति जागरूक करना है। इसलिए मोबाइल यूजर्स के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि अपने नाम पर जारी SIM और मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

नोट: इस रिपोर्ट में कानूनी प्रावधानों और दूरसंचार विभाग की 21 सितंबर 2026 की एडवाइजरी के आधार पर जानकारी दी गई है। किसी विशेष मामले में लागू होने वाले कानूनी प्रावधान अलग परिस्थितियों पर निर्भर कर सकते हैं।

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