• होम
  • दिल्ली/NCR
  • दिल्ली को जीरो-वेस्ट बनाने पर जोर, एलजी संधू ने विशेषज्ञों संग बैठक

दिल्ली को जीरो-वेस्ट बनाने पर जोर, एलजी संधू ने विशेषज्ञों संग बैठक

दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर पहले भी लैंडफिल के पुराने कचरे के निस्तारण और नए कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग पर जोर दिया गया है। एलजी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पुराने कचरे को हटाने के साथ रोजाना आने वाले नए कचरे का भी...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 24, 2026 5:00 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: दिल्ली को स्वच्छ और जीरो-वेस्ट शहर बनाने की दिशा में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने विशेषज्ञों के साथ बैठक कर राजधानी में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और विकेंद्रीकृत ठोस कचरा प्रबंधन की संभावनाओं पर चर्चा की। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि कचरे को एक जगह इकट्ठा कर लैंडफिल तक पहुंचाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही उसका अधिक से अधिक प्रसंस्करण किया जाए।

बैठक के दौरान दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जीरो-वेस्ट क्षेत्र विकसित करने की संभावनाओं पर भी मंथन हुआ। इसके लिए वार्ड स्तर पर कचरे की प्रोसेसिंग व्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय निकायों की भूमिका बढ़ाने पर चर्चा की गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच इस बात पर जोर रहा कि कचरा प्रबंधन की व्यवस्था केवल उठाने और उसे दूसरे स्थान तक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कचरे को संसाधन के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में भी काम होना चाहिए।

दिल्ली में रोजाना बड़ी मात्रा में नगर निगम का ठोस कचरा उत्पन्न होता है। ऐसे में पूरी तरह केंद्रीकृत व्यवस्था पर निर्भर रहने से परिवहन, प्रसंस्करण और निस्तारण से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। विकेंद्रीकृत मॉडल के तहत कचरे को उसके स्रोत के आसपास ही अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर स्थानीय स्तर पर संसाधित करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे कचरे के परिवहन की जरूरत कम करने के साथ लैंडफिल पर पड़ने वाले दबाव को भी घटाने में मदद मिल सकती है।

एलजी संधू इससे पहले भी दिल्ली में कचरा प्रबंधन के लिए इंदौर समेत देश के सफल मॉडलों से सीख लेने की बात कह चुके हैं। सितंबर की शुरुआत में एमसीडी और आईआईटी दिल्ली की संयुक्त कार्यशाला में उन्होंने कचरे को केवल लैंडफिल तक पहुंचाने के बजाय उससे उपयोगी संसाधन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया था। इस दौरान स्रोत पर कचरे का पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई थी।

नई योजना के तहत वार्ड स्तर पर कचरे की प्रोसेसिंग को मजबूत करने की दिशा में स्थानीय जरूरतों के अनुसार मॉडल तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के साथ जैविक कचरे से कंपोस्ट तैयार करने और रिसाइकिल होने वाली सामग्री को दोबारा उपयोग में लाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इससे कचरे की मात्रा कम करने और उपयोगी सामग्री को अर्थव्यवस्था में वापस लाने का रास्ता तैयार होगा।

दिल्ली में पहले से कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन के प्रयोग किए गए हैं। दक्षिण दिल्ली के नवजीवन विहार में जीरो-वेस्ट कॉलोनी मॉडल के तहत स्रोत पर कचरा अलग करने, विकेंद्रीकृत कंपोस्टिंग और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया गया है। एलजी ने इस मॉडल का निरीक्षण करते हुए इसे दूसरे इलाकों में अपनाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया था।

कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरों, बाजारों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को शुरुआत से ही अलग-अलग श्रेणियों में रखने से स्थानीय प्रोसेसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके लिए जागरूकता अभियान, निगरानी और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होगी।

एलजी की बैठक में जीरो-वेस्ट इलाकों के विकास के साथ यह भी विचार किया गया कि अलग-अलग वार्डों की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार कचरा प्रबंधन के मॉडल तैयार किए जाएं। दिल्ली में घनी आबादी वाले क्षेत्रों, बाजारों और आवासीय कॉलोनियों की जरूरतें अलग हैं, इसलिए एक ही मॉडल को हर जगह लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा सकता है।

दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर पहले भी लैंडफिल के पुराने कचरे के निस्तारण और नए कचरे की वैज्ञानिक प्रोसेसिंग पर जोर दिया गया है। एलजी ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पुराने कचरे को हटाने के साथ रोजाना आने वाले नए कचरे का भी वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण होता रहे।

विकेंद्रीकृत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने का उद्देश्य दिल्ली में सफाई व्यवस्था को केवल अभियान आधारित गतिविधि के बजाय नियमित और टिकाऊ प्रणाली में बदलना है। वार्ड स्तर पर प्रोसेसिंग, बेहतर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और नागरिक भागीदारी को मजबूत करने से राजधानी में कचरे के प्रबंधन की पूरी श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और विभिन्न क्षेत्रों में इनके परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जा सकती है।

 

Advertisement