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देश के चार बंदरगाह बने मेगा पोर्ट, मुंद्रा को भी मिला दर्जा

मेगा पोर्ट की नई श्रेणी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर कार्गो संचालन, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक समुद्री बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है। सरकार पहले ही बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के तहत नए बर्थ और टर्मिनल, मशीनीकृत कार्गो हैंडलिंग, ड्रेजिंग, डिजिटल तकनीक और सड़क-रेल कनेक्टिविटी पर

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Gauravshali Bharat News
  • September 26, 2026 7:15 pm IST, Published 7 hours ago

भारत के समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 25 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज हुआ, जब केंद्र सरकार ने देश के चार बंदरगाहों को पहली बार ‘मेगा पोर्ट’ के रूप में अधिसूचित किया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक दीनदयाल पोर्ट, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, पारादीप पोर्ट और मुंद्रा पोर्ट को इस नई श्रेणी में शामिल किया गया है। इनमें मुंद्रा पोर्ट की स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि यह सरकारी मेजर पोर्ट नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र से जुड़ा बंदरगाह है।

यह फैसला भारतीय बंदरगाह क्षेत्र में क्षमता, कार्गो हैंडलिंग और लॉजिस्टिक्स के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। सरकार ने भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 2025 की धारा 73 के तहत मेगा पोर्ट के वर्गीकरण के लिए मानदंड तय किए थे। इसके बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले बंदरगाहों को औपचारिक रूप से इस श्रेणी में अधिसूचित किया गया। अधिसूचना के अनुसार इन चारों बंदरगाहों ने निर्धारित मानदंड पूरे किए हैं।

मुंद्रा पोर्ट का इस सूची में शामिल होना अदाणी समूह के लिए भी महत्वपूर्ण है। मुंद्रा गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित है और लंबे समय से भारत के प्रमुख निजी बंदरगाह परिसरों में गिना जाता है। गुजरात सरकार की जानकारी के अनुसार यहां व्यावसायिक परिचालन 1998 में शुरू हुआ था और इसके बाद कंटेनर, बल्क कार्गो तथा अन्य समुद्री सुविधाओं का विस्तार किया गया।सरकार के इस फैसले से बंदरगाहों को लेकर नीति के स्तर पर भी एक नया ढांचा सामने आया है। इससे पहले केंद्र सरकार वर्ष 2047 तक कई बंदरगाहों और पोर्ट क्लस्टरों को मेगा पोर्ट के रूप में विकसित करने की योजना बता चुकी है।

2024 में सरकार ने छह पोर्ट क्लस्टरों के विकास की जानकारी दी थी, जिनमें कुछ की क्षमता 300 मिलियन टन सालाना से अधिक और कुछ की 500 मिलियन टन से अधिक रखने की योजना बताई गई थी।  भारत के समुद्री व्यापार में बंदरगाहों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र के अधीन मेजर पोर्ट्स ने कुल 915.17 मिलियन टन कार्गो संभाला था, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 7.06 प्रतिशत अधिक था। सरकार का कहना है कि क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण और लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है।

मेगा पोर्ट की नई श्रेणी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर कार्गो संचालन, बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक समुद्री बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है। सरकार पहले ही बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के तहत नए बर्थ और टर्मिनल, मशीनीकृत कार्गो हैंडलिंग, ड्रेजिंग, डिजिटल तकनीक और सड़क-रेल कनेक्टिविटी पर जोर दे रही है।

मुंद्रा के मामले में यह दर्जा इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि चार अधिसूचित मेगा पोर्ट में यह निजी क्षेत्र से जुड़ा एकमात्र पोर्ट है। हालांकि मेगा पोर्ट का दर्जा मिलना अपने आप में किसी बंदरगाह के स्वामित्व में बदलाव का संकेत नहीं है। यह एक नियामकीय वर्गीकरण है, जो निर्धारित क्षमता और प्रदर्शन मानकों के आधार पर किया गया है।  इस फैसले के बाद भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे में सरकारी और निजी क्षेत्र की भूमिका के बीच तालमेल का महत्व भी सामने आता है। केंद्र सरकार बंदरगाह क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ निजी भागीदारी और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को भी बढ़ावा दे रही है। मंत्रालय के मुताबिक 2025-26 में प्रमुख बंदरगाहों के कार्गो में निजी भागीदारी से संचालित क्षमता का हिस्सा भी बढ़ा है।

इस तरह चार बंदरगाहों को पहली बार ‘मेगा पोर्ट’ का दर्जा दिया जाना भारत की समुद्री नीति में एक नया प्रशासनिक और कारोबारी अध्याय खोलता है। दीनदयाल, जेएनपीए और पारादीप के साथ मुंद्रा का शामिल होना यह भी दिखाता है कि देश के समुद्री व्यापार नेटवर्क में बड़े पैमाने पर कार्गो संचालन करने वाले अलग-अलग मॉडल के बंदरगाहों को एक साझा रणनीतिक ढांचे में रखा जा रहा है।

 

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