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केदारनाथ लेजर शो पर कांग्रेस हमलावर, गणेश गोदियाल ने बीजेपी को घेरा

सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना चाहिए कि श्रद्धा केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित विषय नहीं है। उनके मुताबिक, धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों पर लोगों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे धामों की पहचान सदियों पुरानी परंपराओं से बनी है और...

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  • September 28, 2026 10:55 am IST, Published 2 hours ago

देहरादून: केदारनाथ धाम में हुए लेजर शो को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस आयोजन को लेकर भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों की परंपराओं और मान्यताओं के साथ किसी भी तरह का प्रयोग श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा विषय है। कांग्रेस ने केदारनाथ में आयोजित लेजर शो में एक व्यक्ति को भगवान की मुद्रा में प्रदर्शित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसका विरोध किया है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ केवल धार्मिक स्थल नहीं हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। उनके मुताबिक इन धामों की अपनी धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी की धार्मिक आस्था का इस्तेमाल राजनीतिक हितों तक सीमित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से केदारनाथ में लेजर शो के माध्यम से प्रस्तुति दी गई, उससे धाम की पारंपरिक पहचान और धार्मिक वातावरण को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

कांग्रेस नेता ने विशेष रूप से केदारनाथ धाम में भगवान शिव की आराधना और वहां की धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ में भगवान शिव को आराध्य माना जाता है और बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप की पूजा होती है। ऐसे में धार्मिक स्थलों पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करते समय वहां की मान्यताओं और परंपराओं का ध्यान रखा जाना जरूरी है। गोदियाल ने आरोप लगाया कि लेजर शो में जिस तरह एक व्यक्ति को ध्यान मुद्रा में प्रदर्शित किया गया, वह धार्मिक भावनाओं के लिहाज से उचित नहीं है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी इस प्रस्तुति का विरोध करती है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बीच संतुलन होना चाहिए। धार्मिक स्थलों पर तकनीकी प्रस्तुतियों का उद्देश्य ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे वहां की मूल धार्मिक भावना प्रभावित होने की आशंका पैदा हो। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने और भविष्य में ऐसे आयोजनों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की।

गोदियाल ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना चाहिए कि श्रद्धा केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित विषय नहीं है। उनके मुताबिक, धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों पर लोगों की भावनाओं का सम्मान करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे धामों की पहचान सदियों पुरानी परंपराओं से बनी है और इनके स्वरूप को किसी भी कार्यक्रम के दौरान ध्यान में रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस के इस बयान के बाद उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर होने वाले आयोजनों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। एक तरफ आधुनिक तकनीक के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिशें होती रही हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने इस तरह की प्रस्तुतियों की सीमा और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सवाल उठाए हैं। फिलहाल गणेश गोदियाल के बयान ने केदारनाथ में हुए लेजर शो को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस का कहना है कि धामों की धार्मिक गरिमा और परंपराओं से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

 

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