• होम
  • पंजाब
  • अमित शाह ने नशामुक्त पंजाब के संकल्प पर जोर

अमित शाह ने नशामुक्त पंजाब के संकल्प पर जोर

नशे के प्रभाव से परिवारों, युवाओं और समुदायों पर पड़ने वाले असर को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता और उपचार कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार की नशामुक्त भारत पहल में केवल पुलिस कार्रवाई को ही आधार नहीं बनाया गया है। इसमें जागरूकता, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी को भी शामिल किया...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 30, 2026 5:00 pm IST, Published 1 hour ago

जालंधर:  नशामुक्त पंजाब के अभियान को लेकर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के सामाजिक, कृषि और सैन्य योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजाब का देश के विकास और सुरक्षा में ऐतिहासिक योगदान रहा है। उनके संबोधन में राज्य के किसानों और जवानों की भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।

अमित शाह ने कहा कि पंजाब लंबे समय से देश के लिए खाद्य सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार रहा है। उनके मुताबिक, जब भी देश को खाद्यान्न की जरूरत पड़ी, पंजाब के किसानों ने उत्पादन बढ़ाकर देश की जरूरतों को पूरा करने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि आज भी पंजाब का किसान देश के अन्न भंडार को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गृह मंत्री ने पंजाब के जवानों के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले स्वतंत्रता आंदोलन में और आजादी के बाद देश की सीमाओं की सुरक्षा में पंजाब के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा के लिए पंजाब के सैनिकों का बलिदान भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जालंधर में अमित शाह का कार्यक्रम मुख्य रूप से नशे के खिलाफ अभियान से जुड़ा रहा। केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई, तस्करी रोकने और नशे की मांग कम करने के लिए कई स्तरों पर अभियान चलाने की बात कही है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने 2026 से 2029 के लिए नशामुक्त भारत को लेकर एक रोडमैप भी तैयार किया है। इसमें प्रवर्तन, खुफिया कार्रवाई, नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर नियंत्रण, उपचार और पुनर्वास जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।सरकारी रोडमैप में नशे की रोकथाम के साथ-साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी जोर दिया गया है। सरकार ने मार्च 2029 तक नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों को अभियान से जोड़ने की योजना भी बताई गई है।

अमित शाह पहले भी नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दे चुके हैं। सितंबर में आयोजित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की राष्ट्रीय बैठक में उन्होंने ड्रग नेटवर्क को केवल जब्ती तक सीमित रखने के बजाय उसके पूरे नेटवर्क को निशाना बनाने की रणनीति पर जोर दिया था। इसमें वित्तीय जांच और डिजिटल माध्यमों से जुड़े नेटवर्क की पहचान को भी महत्वपूर्ण बताया गया। जालंधर के कार्यक्रम में पंजाब के संदर्भ में नशे की समस्या पर चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है।

नशे के प्रभाव से परिवारों, युवाओं और समुदायों पर पड़ने वाले असर को लेकर विभिन्न स्तरों पर जागरूकता और उपचार कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं। केंद्र सरकार की नशामुक्त भारत पहल में केवल पुलिस कार्रवाई को ही आधार नहीं बनाया गया है। इसमें जागरूकता, रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी को भी शामिल किया गया है। सितंबर 2026 में सरकार ने बताया था कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों को जागरूकता कार्यक्रमों और शपथ अभियानों से जोड़ा गया है।

अमित शाह ने अपने संबोधन में पंजाब की पहचान को कृषि और सैन्य योगदान से जोड़ते हुए राज्य के लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश के खाद्य भंडार को मजबूत करने के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जालंधर में दिए गए इस संबोधन को नशे के खिलाफ चल रहे केंद्र सरकार के व्यापक अभियान के संदर्भ में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस अभियान में राज्यों की भूमिका, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय और नशे से प्रभावित लोगों के उपचार एवं पुनर्वास पर जोर रहने की बात सरकारी दस्तावेजों में कही गई है।

Advertisement