प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फतेहगढ़ के एक सरकारी स्कूल की कथित जर्जर स्थिति का वीडियो बनाने के मामले में आरोपी गौरव भारती उर्फ गौरव कुमार को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने की।
अदालत ने मामले में राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया गया है। मामले की अगली सुनवाई में पुलिस और राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। मामला फतेहगढ़ के नवाबगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपी के खिलाफ 19 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, गौरव भारती ने कथित तौर पर सरकारी स्कूल का वीडियो बनाया और उसकी स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। पुलिस का आरोप है कि स्कूल परिसर का वीडियो बनाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता ने पुलिस के आरोपों को आधारहीन बताया। बचाव पक्ष की दलील थी कि वीडियो बनाकर स्कूल की स्थिति सामने लाने को इस तरह से अपराध नहीं माना जा सकता, जैसा प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है। अधिवक्ता ने हाई कोर्ट की एक अन्य खंडपीठ के 8 सितंबर के आदेश का भी हवाला दिया।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि पहले दिए गए न्यायिक आदेश में समान परिस्थितियों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जा चुका है। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा मामले में भी राहत दिए जाने की मांग की। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मामले को विचार योग्य माना और तत्काल गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। हाई कोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द कर दी गई है या आरोपी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। अदालत ने फिलहाल केवल अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। मामले की कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद लिया जाएगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर काउंटर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया गया है, ताकि वह मामले में अपना पक्ष अदालत के सामने रख सके। इस प्रक्रिया के बाद अदालत प्राथमिकी और आरोपों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार करेगी। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 लगाए जाने को लेकर भी कानूनी पक्ष की दलीलें सामने आई हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इस प्रावधान के इस्तेमाल और प्राथमिकी में लगाए गए अन्य आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन दलीलों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगामी सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल इलाहाबाद हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश से गौरव भारती को गिरफ्तारी से राहत मिली है। राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी। अदालत के अंतिम आदेश से यह स्पष्ट होगा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों के खिलाफ याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर क्या कानूनी स्थिति बनती है।