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केमिस्ट्री नोबेल 2026 में हेनरी कागन और केन्सो सोई को मिला सम्मान

इस खोज का अहम पहलू यह है कि रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान परिस्थितियां ऐसी बन सकती हैं, जिनसे शुरुआत में मौजूद छोटे अंतर को प्रक्रिया खुद बढ़ा देती है। यानी यदि प्रतिक्रिया की शुरुआत पूरी तरह शुद्ध कैटलिस्ट से नहीं हुई है, तब भी रासायनिक प्रक्रिया किसी एक वांछित रूप को धीरे-धीरे अधिक प्रभावी ढंग से पैदा कर सकती है। इसे रासायनिक प्रतिक्रिया के भीतर...

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  • October 7, 2026 4:44 pm IST, Published 1 hour ago

रसायन विज्ञान के 2026 नोबेल पुरस्कार को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और केन्सो सोई को सम्मान दिए जाने की बात कही जा रही है। दावा है कि दोनों वैज्ञानिकों को असममित ऑर्गेनिक सिंथेसिस यानी ऐसी रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी खोजों के लिए चुना गया है, जिनमें किसी अणु के एक विशेष रूप को अधिक मात्रा में तैयार करने की क्षमता विकसित होती है। हालांकि, इस जानकारी की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इसे अंतिम रूप से नोबेल पुरस्कार की खबर माना जाना चाहिए।

बताया गया है कि हेनरी बी. कागन के काम ने ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में लंबे समय से चली आ रही एक धारणा को चुनौती दी। सामान्य तौर पर माना जाता रहा कि यदि किसी रासायनिक प्रक्रिया से किसी एक खास ऑप्टिकल रूप का लगभग पूरी तरह शुद्ध उत्पाद हासिल करना है तो उसके लिए भी अत्यधिक शुद्धता वाला कैटलिस्ट जरूरी होगा। कागन के शोध ने इस सोच को नए तरीके से देखने का रास्ता दिखाया।

इस खोज का अहम पहलू यह है कि रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान परिस्थितियां ऐसी बन सकती हैं, जिनसे शुरुआत में मौजूद छोटे अंतर को प्रक्रिया खुद बढ़ा देती है। यानी यदि प्रतिक्रिया की शुरुआत पूरी तरह शुद्ध कैटलिस्ट से नहीं हुई है, तब भी रासायनिक प्रक्रिया किसी एक वांछित रूप को धीरे-धीरे अधिक प्रभावी ढंग से पैदा कर सकती है। इसे रासायनिक प्रतिक्रिया के भीतर मौजूद नॉन-लीनियर प्रभावों से जोड़कर समझा जाता है।

केन्सो सोई के काम को ऑटोकैटालिसिस से जुड़ी महत्वपूर्ण खोज के तौर पर बताया गया है। ऑटोकैटालिसिस में किसी प्रतिक्रिया से बनने वाला उत्पाद उसी प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करता है। इसे आसान भाषा में स्नोबॉल इफेक्ट की तरह समझा जा सकता है। शुरुआत में बनने वाले कुछ अणु आगे की प्रतिक्रिया को तेज करते हैं और उससे उसी तरह के और अणु बनने लगते हैं। इस तरह प्रक्रिया धीरे-धीरे अपने ही विस्तार को गति देने लगती है।

ऑर्गेनिक सिंथेसिस में किसी अणु के एक विशेष रूप को नियंत्रित तरीके से तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण है। कई दवाओं और औद्योगिक रसायनों में अणु के अलग-अलग रूपों के गुण अलग हो सकते हैं। ऐसे में किसी उपयोगी रूप को अधिक मात्रा में और बेहतर दक्षता के साथ तैयार करने की क्षमता दवा निर्माण और रासायनिक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

इस तरह की खोजों का महत्व केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं माना जाता। फार्मास्यूटिकल उद्योग में जटिल अणुओं को तैयार करने के लिए कई चरणों वाली रासायनिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल होता है। यदि किसी प्रतिक्रिया में वांछित अणु को अधिक प्रभावी ढंग से बनाया जा सके तो इससे समय, कच्चे माल और ऊर्जा की बचत हो सकती है। साथ ही उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में भी मदद मिल सकती है।

ऑटोकैटालिसिस की अवधारणा विज्ञान के एक बड़े सवाल से भी जुड़ती है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश करते रहे हैं कि पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी जटिल अणुओं के निर्माण की शुरुआत किस तरह हुई होगी। ऐसी रासायनिक प्रक्रियाएं, जिनमें कोई उत्पाद आगे की प्रतिक्रिया को स्वयं बढ़ावा देता है, इस सवाल को समझने के लिए उपयोगी मॉडल उपलब्ध करा सकती हैं।

असममित ऑर्गेनिक सिंथेसिस में नॉन-लीनियर प्रभाव और ऑटोकैटालिसिस से जुड़े शोध को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि 2026 के नोबेल पुरस्कार से जुड़ी दी गई जानकारी की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह सम्मान उन वैज्ञानिक उपलब्धियों को रेखांकित करेगा जिन्होंने रासायनिक प्रतिक्रियाओं में नियंत्रण, दक्षता और आत्म-वृद्धि की प्रक्रिया को समझने में नई दिशा दी है।

 

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