नोएडा: नोएडा में डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक कंपनी के खाते से महज 23 मिनट के भीतर 1.56 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाले जाने का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने कंपनी के एजेंट के मोबाइल फोन में मौजूद एक ऐप के जरिए कथित तौर पर रकम ट्रांसफर कर दी। कम समय में लगातार हुए दर्जनों लेनदेन के बाद कंपनी को वित्तीय धोखाधड़ी का पता चला। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगी की घटना के दौरान आरोपियों ने कंपनी के खाते से कुल 43 अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए। इन लेनदेन के जरिए करीब 1.56 करोड़ रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरी रकम निकालने की प्रक्रिया बेहद कम समय में पूरी कर ली गई। महज 23 मिनट के दौरान एक के बाद एक हुए ट्रांजेक्शन ने कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।
कंपनी की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, रकम ट्रांसफर करने के लिए उसके एक एजेंट के मोबाइल फोन में मौजूद ऐप का इस्तेमाल किया गया। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपियों ने ऐप तक किस तरह पहुंच बनाई और उन्हें खाते से जुड़े संवेदनशील विवरण कैसे मिले। पुलिस मामले की तकनीकी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मोबाइल फोन, ऐप या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से ठगी की शुरुआत कैसे हुई।
पुलिस की साइबर टीम अब उन सभी लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनके जरिए रकम अलग-अलग खातों में भेजी गई। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि रकम किन बैंक खातों में पहुंची और उसके बाद उसे कहां-कहां ट्रांसफर किया गया। पुलिस बैंकिंग ट्रेल के साथ-साथ डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है।
अधिकारियों के सामने यह भी चुनौती होगी कि इतनी बड़ी रकम को कम समय में ट्रांसफर किए जाने के दौरान किन सुरक्षा स्तरों को पार किया गया। जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, संबंधित ऐप, लॉगिन गतिविधियों और ट्रांजेक्शन के समय से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती हैं। इसके जरिए ठगी में इस्तेमाल हुए उपकरणों और संभावित आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
कंपनी ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराकर पूरे मामले की जांच और रकम की बरामदगी की मांग की है। पुलिस ने मामले को वित्तीय साइबर अपराध के तौर पर लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की कोशिश है कि ट्रांजेक्शन के दौरान इस्तेमाल किए गए खातों की पहचान जल्द की जाए और जिन लोगों की भूमिका सामने आती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
यह घटना डिजिटल भुगतान से जुड़े कारोबार में साइबर सुरक्षा के महत्व को भी सामने लाती है। खासकर ऐसे संस्थानों में जहां बड़ी रकम का ऑनलाइन लेनदेन होता है, वहां मोबाइल डिवाइस, एप्लिकेशन और बैंकिंग एक्सेस की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी एक खाते या डिवाइस की सुरक्षा में सेंध लगने पर कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम का नुकसान हो सकता है।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 23 मिनट के दौरान किए गए 43 ट्रांजेक्शन के पीछे कितने लोग शामिल थे और रकम को किन-किन खातों में भेजा गया। जांच पूरी होने के बाद ही ठगी की पूरी प्रक्रिया और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।