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ओबीसी आरक्षण पर मोहन यादव से मिले प्रतिनिधि, 27 प्रतिशत आरक्षण बहाली की मांग

ओबीसी प्रतिनिधिमंडल ने 13 प्रतिशत होल्ड पदों से प्रभावित अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया। इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को राहत देने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्प तलाशने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद या सुपरन्यूमरेरी पद सृजित करने की संभावना पर भी विचार किया जाए। उनका कहना है कि इस मुद्दे का समाधान निकालते समय

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CM Mohan Yadav
Gauravshali Bharat News
  • October 16, 2026 2:45 pm IST, Published 2 hours ago

भोपाल: मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद ओबीसी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर आरक्षण की बहाली और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं और संविधान विशेषज्ञों का पैनल गठित करने का सुझाव दिया। साथ ही, ओबीसी वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति तथा सरकारी सेवाओं में उसके प्रतिनिधित्व से जुड़े नए आंकड़े जुटाने की मांग भी की गई।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर को 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से संबंधित याचिका खारिज करते हुए 14 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था जारी रखने का फैसला सुनाया था। इस निर्णय के बाद आरक्षण बढ़ाने की मांग कर रहे संगठनों ने आगे की कानूनी रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी ढंग से उठाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों की सहायता ली जानी चाहिए, ताकि आरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं को अदालत के सामने तथ्यों और आंकड़ों के साथ रखा जा सके।

प्रतिनिधिमंडल ने राज्य में ओबीसी समुदाय की मौजूदा सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए नए सर्वेक्षण की मांग भी रखी। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व से संबंधित आंकड़े जुटाने का सुझाव दिया गया। प्रतिनिधियों का मानना है कि अद्यतन आंकड़ों के आधार पर आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

बैठक में 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए नए अध्यादेश या विधायी प्रस्ताव की संभावना पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार कानूनी पहलुओं का परीक्षण कर आगे की कार्रवाई पर विचार करे। हालांकि, आरक्षण के संबंध में किसी नए अध्यादेश या विधायी प्रस्ताव को लेकर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे की दिशा कानूनी सलाह और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।

ओबीसी प्रतिनिधिमंडल ने 13 प्रतिशत होल्ड पदों से प्रभावित अभ्यर्थियों का मुद्दा भी उठाया। इन पदों पर नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को राहत देने के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्प तलाशने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पद या सुपरन्यूमरेरी पद सृजित करने की संभावना पर भी विचार किया जाए। उनका कहना है कि इस मुद्दे का समाधान निकालते समय प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य और कानूनी स्थिति, दोनों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि आरक्षण से संबंधित किसी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। उसके अनुसार, इस विषय पर निर्णय लेते समय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है। बैठक में आरक्षण की बहाली के लिए सरकार से आगे की रणनीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया।

इधर, ओबीसी महासभा ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण की मांग को लेकर उसका कानूनी संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि जरूरत के अनुसार चरणबद्ध आंदोलन भी चलाया जाएगा। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब इस मुद्दे पर आगे की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली संभावित कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकार के रुख पर रहेगी। आरक्षण की बहाली, लंबित नियुक्तियों और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने जैसे मुद्दे आने वाले समय में इस पूरे विवाद के केंद्र में बने रह सकते हैं।

 

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