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नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने वाली बात सब नाटक हैः अनंत सिंह

नीतीश कुमार को सभी का गुरु बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का इस बिहार विधान परिषद चुनाव से कोई मतलब नहीं है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार न तो नीरज कुमार के पक्ष में हैं और न ही उनके अपने पक्ष में।

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  • October 20, 2026 5:20 pm IST, Published 2 hours ago
बिहार की राजनीति में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े एमएलसी चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। मोकामा से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह ने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार की तबीयत बिगड़ने की खबरों पर सवाल उठाते हुए इसे नाटक करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि नीरज कुमार की बीमारी को लेकर जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं, उनमें सच्चाई नहीं है। अनंत सिंह के इस बयान ने बिहार की राजनीतिक चर्चाओं को एक नया मुद्दा दे दिया है।
अनंत सिंह ने कहा कि कुछ लोग यह बता रहे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नीरज कुमार से मिलने अस्पताल गए थे, लेकिन उनके मुताबिक ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक खेल बताते हुए कहा कि नीरज कुमार न तो बीमार हैं और न ही उन्हें बुखार है। विधायक ने दावा किया कि उनकी तबीयत खराब होने की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और यह सब केवल नाटक है।
उन्होंने कहा कि यह नीरज कुमार की पुरानी आदत है कि जब बूथ पर पैसे भेजने या खर्च देने की बारी आती है, तो वह बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं और दो घंटे बाद ठीक हो जाते हैं। अनंत सिंह के बयान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने नीरज कुमार की सेहत को लेकर सामने आई जानकारी पर सीधे सवाल उठाए हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका को लेकर भी अनंत सिंह ने अपनी बात स्पष्ट अंदाज में रखी। उन्होंने नीतीश कुमार को सभी का गुरु बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का इस बिहार विधान परिषद चुनाव से कोई मतलब नहीं है। उनके मुताबिक, नीतीश कुमार न तो नीरज कुमार के पक्ष में हैंऔर न ही उनके अपने पक्ष में। इस टिप्पणी के जरिए अनंत सिंह ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनाव में जीत-हार का फैसला राजनीतिकदावों या किसी नेता के समर्थन से नहीं, बल्कि मतदाताओं के निर्णय से होगा।

बिहार में विधान परिषद की सीटों से जुड़े चुनाव हमेशा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन चुनावों के परिणामों का असर दलोंकी रणनीति, नेताओं की राजनीतिक स्थिति और संगठन के भीतर समीकरणों पर भी पड़ सकता है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े चुनाव मेंजदयू प्रत्याशी नीरज कुमार को एनडीए का समर्थन प्राप्त होने के कारण इस मुकाबले पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में उम्मीदवार कीतबीयत को लेकर उठे सवाल और नेताओं के बयान चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकते हैं।

अनंत सिंह ने अपने बयान में जनता की भूमिका लें को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि जनता ही मालिक है और जिसे वोट दिया जाएगा, वही जीत हासिल करेगा। उनका यह कथन चुनावी प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार और उनकी निर्णायक भूमिका पर जोर देता है। हालांकि, चुनावमें उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्थिति, राजनीतिक दलों का समर्थन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएं भी चर्चा का हिस्सा बन सकतीहैं।

नीतीश कुमार को लेकर अनंत सिंह की टिप्पणी भी राजनीतिक दृष्टि से अहम है। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय सेएक प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके समर्थन को लेकर किसी भी तरह की अटकलें चुनावी चर्चा को प्रभावित कर सकती हैं। अनंत सिंह नेअपने बयान के माध्यम से इन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की और कहा कि मुख्यमंत्री किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में नहीं हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है। एक ओर नीरज कुमार की तबीयत कोलेकर सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर अनंत सिंह ने इन खबरों को गलत बताते हुए राजनीतिक नाटक करार दिया है। अब इस मामले मेंनीरज कुमार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया और उनकी स्वास्थ्य स्थिति से संबंधित आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल, अनंत सिंह के बयान ने बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। उनके आरोपों और दावों को राजनीतिक बयान के रूप में देखाजाना चाहिए, न कि नीरज कुमार की स्वास्थ्य स्थिति का प्रमाण मानकर। चुनावी मुकाबले में अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयानबाजी का चुनावी माहौल पर कितना असर पड़ता है और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं का रुख किस उम्मीदवार के पक्ष में जाता है।

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