इंफाल: मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य के कामजोंग जिले के एक खाली गांव में बुधवार सुबह संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा कई घरों को आग के हवाले किए जाने से स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है। वहीं दूसरी ओर, खोंगबल तंगखुल इलाके में तीन मैतेई लोगों की हत्या के खिलाफ मणिपुर मूल निवासी समिति (NPCM) के 48 घंटे के बंद के आह्वान से पूरे राज्य में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, चसाद गांव के पास स्थित खाली पड़े खोइकाई कुकी गांव में बुधवार सुबह करीब 5.30 बजे संदिग्ध उग्रवादियों ने कई घरों में आग लगा दी। कुकी और नगा समुदायों के बीच पहले बढ़ी झड़पों के चलते ग्रामीण इस गांव को पहले ही छोड़कर जा चुके थे। घटना में हुए नुकसान और इसमें शामिल लोगों की पहचान का फिलहाल पता लगाया जा रहा है।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत से राज्य में जनजातीय समुदायों के बीच हुई जातीय झड़पों में 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और दर्जनों मकान जलकर खाक हो चुके हैं। तमेंगलोंग, नोनी, कांगपोकपी, उखरुल और कामजोंग वर्तमान में सबसे ज्यादा हिंसा से प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
खोंगबल तंगखुल इलाके में हाल ही में तीन मैतेई लोगों की हत्या और कई लोगों के घायल होने की घटना के विरोध में एनपीसीएम (NPCM) ने सोमवार आधी रात से पूरे राज्य में 48 घंटे के बंद का ऐलान किया था। इस बंद का असर पहाड़ी और घाटी दोनों तरह के जिलों में साफ देखने को मिल रहा है।
सड़कें अवरुद्ध: प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सड़कों पर बैठकर और बीच रास्ते में लकड़ी के लट्ठे रखकर आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी है।
सख्त कार्रवाई की मांग: समिति ने हमलावर सशस्त्र समूहों के खिलाफ निर्णायक सुरक्षा कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
मणिपुर में लगातार बिगड़ते हालात और नागरिकों की हत्या पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए पूछा है कि “शासन की भारी विफलता की जिम्मेदारी कौन लेगा?” खरगे ने नागरिकों की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से राज्य में जल्द शांति बहाली और विस्थापितों के पुनर्वास के लिए स्पष्ट जवाब की मांग की है।